आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५५७ १५ दोऊ मारैं तलवारी ते दोऊ लेयँ ढालपर वार १५३ कोऊ काहू ते कमती ना द्वउ रणपरा बरोबरि आय ॥ गुर्ज चलाई फिरि चौंड़ा ने हौदा झुके कनौजीराय १५४ ताकिकै भाला लाखनि मारा हाथी मस्तक गयो समाय ॥ हाथी गिरिगा यकदनता तहँ पैदलभयो चौंडियाराय १५५ भागि सिपाही दिल्ली वाले अपने डारि डारि हथियार ॥ लैकै डोला आगे चलिभा लाखनिकनउजकासरदार १५६ गाहरिकारा फिरि दिल्ली मा जहँ पर भरीलाग दरबार ॥ ताहर धाँधू तहँ बैठे हैं अंगदनृपतिग्वालियरक्यार १५७ तहँ हरिकारा बोलन लाग्यो दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥ जूझि ग हाथी इकदन्ता है लश्कर सबैगयो भराय १५८ डोला जावत है मोहबे को साँची खबरि दीने बतलाय ॥ सुनिकै बातैं हरिकारा की लश्करतुरतलीनसजवाय १५६ आदिसयङ्कर चढ़ि गज ऊपर तुरतै कूच दीन करवाय ॥ बाजैं डंका अह्तंका के हाहाकार शब्दगा छाय १६० तुरही मुरही तहँ बाजत भइँ पुप्पू पुप्पू ध्वनी लगाय ॥ धम् धम् धम् धम् बजैं नगारा मारा मारा परै सुनाय १६१ को गनि बरणै त्यहि समयाकै हमरे बूत कही ना जाय ॥ पहिले मारुइ भइँ तोपन्ह की गोलाचलनलागिहहराय १६२ बड़ी दुर्दशा भइँ तोपन में तब फिरि मारुवन्द है्जाय ॥ मघा के बूँदन गोली बरषी क्षत्रीगये बहुत महराय १६३ तीर तमंचा भाला बरछी कोताखानी बर्छी कटार ॥ भा भटभेरा दल पैदल का घोड़नलड़ै घोड़असवार १६४ है दलगंजन के ऊपर मा ताहर पिरथी राजकुमार ॥