आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
DevanagariHindipublished618 पृष्ठ
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२२ आल्हाखण्ड । ५६४ बैलारानी के गौने की पूरण भई दूसरी गाथ २३४ पूरि तरंग यहाँ सों द्वैगे तव पद सुमिरि भवानीकन्त ॥ राम रमा मिलि दर्शन देवैं इच्छायही मोरि भगवन्त २३५ इति श्रीलखनऊनवासि (सी,आई,ई) मुंशीनवलकिशोरात्मजवाबूप्रयागनारायण जीकी आज्ञानुसारउन्नामप्रदेशान्तर्गतपँड़रीकलानिवासि मिश्रवंशोद्भव बुधकृपाशङ्करसूनु पण्डितललिताप्रसादकृत बेलागमन द्वितीययुद्धवर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥ बेलागमनद्वितीययुद्धसमाप्त ॥ इति ॥