भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 609, कुल 618 में से

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पृष्ठ 609

४ आल्हखण्ड । ६०८ मुण्डन केरे मुड़ धौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार २० मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार ॥ कायर भागे समर भूमि ते अपने डारि डारि हथियार २३ भूरा सय्यद का मुर्चा भा दूनों लड़न लागि सरदार ॥ दूनों मारैं तलवारी सों दूनों लेयँ ढाल पर वार २४ उसरिन उसरिन दूनों खेलैं जैसे कुवाँ भरै पनिहारि ॥ वार चूकिया भूरा जबहीं सय्यद हना तुरत तलवारि २५ मूड़ बिसानी सो भूरा के तुरतै गिरा भरहराखाय ॥ भूरा जूझयो जब खेतन में आयो तुरत भुगन्ता धाय २६ सो ललकारयो फिरि सय्यदको अब रण सावधान है जाय ॥ धोखे भूरा के भूल्यो ना अबहीं यमपुर देउँ दिखाय २७ इतना कहिकै वीर भुगन्ता तुरतै लीन्ह्यो तीर चढ़ाय ॥ खैंचि कमानिया ते मारत भा सय्यद लैगे वार बचाय २८ घोड़ बढ़ायो फिरि सय्यद ने लैकै गुर्ज पहुंच्यो जाय ॥ वीर भुगन्ता को ललकारा क्षत्री खबरदार है जाय २६ वार हमारी ते बचि है ना दोजख अबै देउँ पहुँचाय ॥ इतना कहिकै क्रोधिन हैकै सय्यद मारयो गुर्ज घुमाय ३० वार बचाई वीर भुगन्ता फिरित्यहिखैंचिली न तलवार ॥ ऐँचि कै मारा वीर भुगन्ता जूझयो बनरस का सरदार ३१ सय्यद जूझयो जब मुर्चा में तब चढ़ि अयो कनौजीराय ॥ गंगा ठाकुर तिन पाछे करि आगे गयो तड़ाकाधाय ३२ वीर भुगन्ता औ गंगा का परिगासमर बरोबरि आय ॥ लखै पिथौरा औ कनौजिया अद्भुतसमर कहा ना जाय ३३ आदिभयङ्कर पर पिरथी है लाखनि भूरी पर असवार ॥

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