भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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१८ . आल्हाखण्ड । ६६ जायकै पहुँचे बबुरीबनमाँ तहँ पर तम्बू दीन गड़ाय ६० तंग बछेड़न की छोरीगइँ हाथिन हौदा घरे उतार ॥ बैठक साजीगय आल्हाकै लागीं छोटी बड़ी बजार ६१ लै लै सीधा चले सिपाही भोजन करन हेतु तय्यार ॥ बनी रसोइयाँ राजपूतन की ज्वानन खूबकीन ज्यौनार ६२ दिन दश बीते बबुरीवनमाँ ग्यरहें बोले उदयसिंहराय ॥ किहिकीनिंदिया आल्हा सोये औ कब ल्यहैं बापका दायँ ६३ तुरत बुलायो फिरि यकवा का बोल्यो बचन बनाफरराय ॥ शकुन विचारो अब जल्दी सों माड़ो काम सिद्धि है जाय ६४ सुनिकै बातें बघऊदन की देवा पोथी लीन उठाय ॥ सोचि समुझिकै देवा बोल्यो हमरे सुनो बनाफरराय ६५ जल्दी चलिये अब माड़ो को साइति बहुत गई नगच्याय ॥ सुनिकै बातें ये देवा की बोला बचन बनाफरराय ६६ उठिये दादा सावधान हो नहिं सब जैहैं काम नशाय ॥ सुनिकै बातें बघऊदन की आल्हा उठे रामको ध्याय ६७ पाँचो मिलिकै तम्बू चलिभे जहँ पै रहें द्यावलदे माय ॥ देखिबालकनको द्यावलि फिरि सबको छाती लीनलगाय ६८ बड़ी प्रीति करि मलखाने सों बोली जियो बनाफरराय ॥ मस्तक सूँघ्यो सब लरिकनको पीठिमैं दीन्ह्यो हाथ फिराय ६६ द्यावलि बोली फिरि सय्यदसौं राजा बनरस के सरदार ॥ जैसे लड़िका ई हमरे हैं तैसे लड़िका लगैं तुम्हार ७० रक्षा कीन्ह्यो सब लड़िकन कै द्यावर बड़ा भरोसा त्वार ॥ सुनिकै बातें ये द्यावलि की बोला बनरस का सरदार ७१ बार न बांका इनका जाई द्यावलि मानो कही हमार ॥