भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 89

३६ आल्हखण्ड । ८४ योगी आये म्वरे महलन में तिनका हारदीन पहिराय ॥ सुनिकै बातें ये माता की राजै खबरि जनायो आय १०६ धोखे योगिनके भूल्यो ना वै राजन के राजकुमार ॥ घरघर लूटा तिन माड़ो भल वै लैगये नौलखाहार १०७ सुनिकै बातें ये करिया की जम्बै हुकुमदीन फरमाय ॥ पकरिलय आवोतुम योगिनको हमरी नजर गुजारोआय १०८ उनहीं पाँयन करिया चलिभो अपनी लिहे ढाल तलवार ॥ जायकै पहुँचा पचपेड़ा तर गरई हांकदीन ललकार १०६ तुम्हें बुलावत महराजा हैं योगिउ चलो हमारे साथ ॥ लौटैकेरी म्वहिं आज्ञा ना हमरे सत्य सुमिरनी हाथ ११० सुनिकै बातें ये योगिनकी करिया खैंचिलई तलवारी ॥ पाँव अगाड़ी को डारयो जो खण्डाकरों तुरतही चारि १११ बातें सुनिकै ये करिया की ऊदन खैंचिलीन तलवारी ॥ धोखे योगी के भूले ना नहिंशिरकाटिदेउँभुइँडारि ११२ आल्हा मलखे देवा सय्यद इनहुन खैंचिलई तलवार ॥ दौरे करियाके ऊपर सब गरई हांकदेत ललकार ११३ करिया सोच्यो अपने मनमाँ ये नहिं योगिनकेर कुमार ॥ ये हैं लड़िका मोहवे वाले एक ते एक शूरसरदार ११४ जो हम बोलैं इन योगिनते तौ फिरिजाय प्राणपर आय ॥ यहै सोचिकै करिया लौटौ जम्बाढिगै पहुँचा जाय ११५ हाथ जोरिकै करिया बोलो दादा मानो कही हमार ॥ धोखे भूल्यो ना योगिनके वै द्यौवलिके राजकुमार ११६ सुनिकै बातें ये करिया की बोला माड़ोका सरदार ॥ तुरत नगड़ची को बुलवावो फौजैं सबै होयँ तय्यार ११७