अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)
Amanaska Yoga with Intro by MM Gopinath Kaviraj
गुरु गोरखनाथ (भूमिका: महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज) द्वारा
पृष्ठ 31, कुल 128 में से
संदर्भ में पढ़ेंगोरक्षनाथ का जीवन, दर्शन और साधना नवनाथों की जो विभिन्न सूचियाँ अब तक उपलब्ध हुई हैं, उनमें से अनेक में गोरक्षनाथ का नाम अन्तर्गतणित है। चौरासी सिद्धों की भी जो सूचियां अभी तक मिली हैं, उनमें से गोरक्षनाथ का वर्ण- रत्नाकर की 'चौरासी सिद्ध वर्णना' में दूसरा और सस्क्य विहार की तिब्बती सूची में नौवां स्थान है। हठयोगप्रदीपिका में महासिद्धों के गणनाप्रसंग में आदिनाथ, मत्स्येन्द्र, शाबरानन्द, भैरव, चौरंगी, मीन के बाद गोरक्ष का ही स्मरण किया गया है।¹ सस्क्य विहार की सूची का अनुसरण करनेवाली बौद्ध सिद्धों की जो चित्रावली महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने सबसे पहले गंगा पुरातत्त्वांक² में १. तांत्रिक बौद्ध साधना और साहित्य—डा० नागेन्द्रनाथ उपाध्याय, पृ० २१०-२११, २१४ । २. पृ० २१६ से आगे, जनवरी १६३३, गंगा कायालय, कृष्णगढ़, सुलतान- गंज, भागलपुर, बिहार ।