भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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<center>यात्राकाण्ड<br>प्रथम सर्ग</center>ब्राह्मणोंके साथ सीताका ससमारोह गंगापूजन करना१८१
श्रीशिवजीसे पार्वतीके प्रश्न और शङ्करजीका उत्तर१६१रामके दर्शनार्थ च्यवन मुनिका आना और बाणोंसे प्राप्त होनेवाले कष्टोंका वर्णन करना, उनका दुःख दूर करनेके लिए रामका अपने बाणसे जलंघ्य खाई खोदना१८२
सहसा वाल्मीकिके मुखसे कविताका प्रादुर्भाव१६२कुम्भोदर मुनिका रामदूतोंसे वार्तालाप, दूतोंके आग्रह करनेपर भी उनका बिना भोजन किये लौटना और पूछनेपर कारण बताना१८३
ब्रह्माका वाल्मीकिके आश्रमपर आकर राम-चरित लिखनेका आग्रह करना१६३कुम्भोदर मुनिके आक्षेप सुनकर रामका तीर्थयात्राकी तैयारी करना; पुष्पक विमानका रामके आदेशसे दस योजन विस्तृत और सौ धनुषका ऊंचा होना१८४
<center>द्वितीय सर्ग</center>रामका तीर्थयात्राके लिए प्रस्थान१८५
वाल्मीकिकृत रामायणनिर्माण, उसे सुननेके लिए देवता-यक्ष-नागादिकोंका आगमन१६४रामकी चार ध्वजाओंका वर्णन१८६
रामायण प्राप्त करनेके लिए उनमें परस्पर कलह और विष्णुभगवान् द्वारा रामायणका विभाजन१६५<center>षष्ठ सर्ग</center>
नारदजीके द्वारा व्यासजीको चार श्लोक प्राप्त होना१६७रामका सदल-बल प्रयाग पहुँचना, वहाँसे चलकर काशी पहुँचना और विविध लोकोपकारी कार्य तथा दान करते हुए एक साल वहाँ रहना१८७
<center>तृतीय सर्ग</center>काशीमें रामका अनेक तीर्थोंकी स्थापना करना१८८
पार्वतीका शंकरजीसे रामदास विष्णुदासके चरित्रविषयक प्रश्न और शिवजीका उत्तर१६९रामकी गयायात्रा, वहाँ फल्गुनदीमें सीताके बालूकाकी दुर्गा बनाते समय राजा दशरथका अपने हाथों बालूकापिण्ड लेना१९१
सीताका रामसे गङ्गातटपर चलनेकी प्रार्थना१७१पिताको पिण्डदान देते समय राजा दशरथका हाथ न दीखनेपर रामका विस्मित होना, लक्ष्मण और सीतासे पूछनेपर सीताका कारण बताना१९२
रामका लक्ष्मणको यात्राकी तैयारी करनेका आदेश देना१७२सीताका आम्रवृक्ष, फल्गुनदी, गयावाल ब्राह्मणों, बिल्ली तथा अश्वको साक्षी देनेके लिए कहना और उनके इनकार करनेपर शाप देना, अन्तमें सूर्यकी साक्षीसे प्रसन्न रामके पिता दशरथका प्रत्यक्ष प्रकट होना१९३
गङ्गायात्रासम्बन्धी समाचारसे प्रजाजनमें उल्लासकी लहर१७३<center>सप्तम सर्ग</center>
<center>चतुर्थ सर्ग</center>रामकी दक्षिण भारतकी तीर्थयात्राका विवरण१९५
रामचन्द्रका ज्योतिषी बुलाकर उत्तम मुहूर्त्त पूछना१७४तोताद्रिमें कन्याकुमारीका रामसे भेंट और रामका उसे वरदान देना१९८
रामचन्द्रका गङ्गातटको प्रस्थान१७५<center>अष्टम सर्ग</center>
यात्राकालीन उल्लासका वर्णन१७६भारतके पश्चिमी प्रदेशके तीर्थोंकी यात्राका विवरण, सवारीपर बैठकर यात्रा करनी चाहिए या
रामका महर्षि मुद्गलके आश्रमपर पहुँचना१७८
महर्षि मुद्गलका अपने नवीन आश्रमसे रामके दर्शनार्थ प्राचीन आश्रमपर जाना और पूछनेपर आश्रमत्यागका कारण बतलाना, रामका मुनि मुद्गलसे सरयूकी श्रेष्ठताके विषयमें प्रश्न और मुनिका उत्तर१७९
रामके आदेशसे लक्ष्मणका बाण चलाकर सरयूके दो भाग करके एक भागको मुद्गलके पूर्व आश्रमपर लाना१८०
<center>पञ्चम सर्ग</center>
सीताका गंगापूजनकी तैयारी करना, कौसल्या आदि सासुओं, सोहागिन स्त्रियों तथा बहुतेरे