अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)
Anubhashya on Brahma Sutras by Mahaprabhu Vallabhacharya with Commentary
महाप्रभु वल्लभाचार्य (टीकाकार: गोस्वामी पुरुषोत्तम जी महाराज) द्वारा
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वत्त्राप्यभिन्नतमःपदसत्त्वात्!
* "निर्गुणपदवत्त्राप्यभिन्नतमःपदसत्त्वात्" = "निर्गुणपदवत् तत्रापि अभिन्न-तमःपद-सत्त्वात्"!!
* WOW. That makes 100% philosophical and grammatical sense:
* Just like the word "nirguna", there also ("tatra api" -> ttraapi), because of the presence of the identical word "tamas" ("abhinna-tamah-pada-sattvat").
* Brilliant!
* **Line 20:**
* `मित्यहतपाप्म ब्रह्म । पराशरे ब्रह्मनिरूपणेऽपि । मनुस्मृतिषु तमोनिरूपणं तदवान्तरप्रलयविषयं`
* Wait, look at `पराशरे ब्रह्म...`:
* Is it `ब्रह्मनिरूपणेऽपि` or `ब्रह्मकनिरूपणेऽपि`?
* Wait, line 20: `पराशरे` then `ब्रह्म` then `नि` `रू` `प` `णे` `ऽ` `पि`! It is `पराशरे ब्रह्मनिरूपणेऽपि ।` (No 'क').
* Wait, look at before it:
* `मित्यहतपाप्म ब्रह्म ।` -> wait, `मित्यपहतपाप्मा` or