भारतकोश
अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

अणुभाष्य (महाप्रभु वल्लभाचार्य - शुद्धाद्वैत वेदान्त ब्रह्मसूत्र महाभाष्य प्रकाश टीका सहित)

Anubhashya on Brahma Sutras by Mahaprabhu Vallabhacharya with Commentary

महाप्रभु वल्लभाचार्य (टीकाकार: गोस्वामी पुरुषोत्तम जी महाराज) द्वारा

DevanagariHindipublished2,600 पृष्ठ

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पृष्ठ 1272

' (L25). In 'भगवत्य' the 'भ' has the same left part. So it is definitely 'श्रुतिभेदवती'.

Let's check line 29: "स्यादेवं यदि कार्यं प्रयोजनवच्च स्यात्तत्तु" Wait, why "प्रयोजनवच्च स्यात्"? Wait, is that "प्रयोजनवच्च" or "प्रयोजनवत् स्यात्"? Look at the image: "स्यादेवं यदि कार्य प्रयोजनवच्च स्यात्तत्तु" -> wait, does it have "स्यात्"? Let's read line 29 from the start: "तत्राहुः कार्यं हीति भाष्ये । स्यादेवं यदि कार्य प्रयोजनवच्च स्यात्तत्तु प्रयोजनवद्दृष्टमतः कारणेऽपि" Wait, where is "स्यात्"? After "प्रयोजनव" there is: 'च्च' ? Then: 'स्या' 'त्त' 'त्तु' ! Wait, 'स्यात्तत्तु' = स्यात् + तत् + तु! So before 'स्यात्तत्तु' is: "कार्य प्रयोजनवच्च" or "कार्य प्रयोजनवत्"? Wait! If it is "कार्य प्रयोजनवत् स्यात्तत्तु", then what is the glyph between 'व' and 'स्या'? Look at line 29: 'का' 'र्य' (kārya) 'प्र' 'यो' 'ज' 'न' '