अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)
Anugita from Mahabharata Ashvamedhika Parva with Commentary
भगवान् श्रीकृष्ण / महर्षि वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 14, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंततः स तं महोच्छ्वासं भृशमुच्छ्वस्य दारुणम् । निष्क्रामन् कम्पयत्याशु तच्छरीरमचेतनम् ॥ २९ ॥ तब वह जीवात्मा बारंबार भयंकर एवं लंबी साँस छोड़कर बाहर निकलने लगता है। उस समय सहसा इस जड शरीरको कम्पित कर देता है ।। २९ ।। स जीवः प्रच्युतः कायात् कर्मभिः स्वैः समावृतः । अभितः स्वैः शुभैः पुण्यैः पापैर्वाप्युपपद्यते ॥ ३० ॥ शरीरसे अलग होनेपर वह जीव अपने किये हुए शुभकार्य पुण्य अथवा अशुभ कार्य पापकर्मोंद्वारा सब ओरसे घिरा रहता है ।। ३० ।। ब्राह्मणा ज्ञानसम्पन्ना यथावच्छ्रुतनिश्चयाः । इतरं कृतपुण्यं वा तं विजानन्ति लक्षणैः ।। ३१ ।। जिन्होंने वेद-शास्त्रोंके सिद्धान्तोंका यथावत् अध्ययन किया है, वे ज्ञानसम्पन्न ब्राह्मण लक्षणोंके द्वारा यह जान लेते हैं कि अमुक जीव पुण्यात्मा रहा है और अमुक जीव पापी ।। ३१ ।। यथान्धकारे खद्योतं लीयमानं ततस्ततः । चक्षुष्मन्तः प्रपश्यन्ति तथा च ज्ञानचक्षुषः ।। ३२ ।। पश्यन्त्येवंविधं सिद्धा जीवं दिव्येन चक्षुषा । च्यवन्तं जायमानं च योनिं चानुप्रवेशितम् ।। ३३ ।। जिस तरह आँखवाले मनुष्य अँधेरेमें इधर-उधर उगते-बुझते हुए खद्योतको देखते हैं, उसी प्रकार ज्ञान-नेत्रवाले सिद्ध पुरुष अपनी दिव्य दृष्टिसे जन्मते, मरते तथा गर्भमें प्रवेश करते हुए जीवको सदा देखते रहते हैं ।। ३२-३३ ।। तस्य स्थानानि दृष्टानि त्रिविधानीह शास्त्रतः । कर्मभूमिरियं भूमैर्यत्र तिष्ठन्ति जन्तवः ।। ३४ ।। शास्त्रके अनुसार जीवके तीन प्रकारके स्थान देखे गये हैं (मृत्युलोक, स्वर्गलोक और नरक)। यह मर्त्यलोककी भूमि जहाँ बहुत-से प्राणी रहते हैं, कर्मभूमि कहलाती है ।। ३४ ।। ततः शुभाशुभं कृत्वा लभन्ते सर्वदेहिनः । इहैवोच्चावचान् भोगान् प्राप्नुवन्ति स्वकर्मभिः ।। ३५ ।। अतः यहाँ शुभ और अशुभ कर्म करके सब मनुष्य उसके फलस्वरूप अपने कर्मोंके अनुसार अच्छे-बुरे भोग प्राप्त करते हैं ।। ३५ ।। इहैवाशुभकर्माणः कर्मभिर्निरयं गताः । अवाग्गतिरियं कष्टा यत्र पच्यन्ति मानवाः । तस्मात् सुदुर्लभो मोक्षो रक्ष्यश्चात्मा ततो भृशम् ।। ३६ ।। यहीं पाप करनेवाले मानव अपने कर्मोंके अनुसार नरकमें पड़ते हैं। यह जीवकी अधोगति है जो घोर कष्ट देनेवाली है। इसमें पड़कर पापी मनुष्य नरकाग्निमें पकाये जाते