भारतकोश
अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)

अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)

Anugita from Mahabharata Ashvamedhika Parva with Commentary

भगवान् श्रीकृष्ण / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 294, कुल 421 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 294

त्रिसप्ततितमोऽध्यायः

सेनासहित अर्जुनके द्वारा अश्वका अनुसरण

वैशम्पायन उवाच दीक्षाकाले तु सम्प्राप्ते ततस्ते सुमहर्त्विजः। विधिवद् दीक्षयामासुरश्वमेधाय पार्थिवम्॥ १॥ वैशम्पायनजी कहते हैं—जनमेजय! जब दीक्षाका समय आया, तब उन व्यास आदि महान् ऋत्विजोंने राजा युधिष्ठिरको विधिपूर्वक अश्वमेधयज्ञकी दीक्षा दी॥ १॥ कृत्वा स पशुबन्धांश्च दीक्षितः पाण्डुनन्दनः। धर्मराजो महातेजाः सहर्त्विग्भिर्व्यरोचत॥ २॥ पशुबन्ध-कर्म करके यज्ञकी दीक्षा लिये हुए महातेजस्वी पाण्डुनन्दन धर्मराज युधिष्ठिर ऋत्विजोंके साथ बड़ी शोभा पाने लगे॥ २॥