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अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)

अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)

Anugita from Mahabharata Ashvamedhika Parva with Commentary

भगवान् श्रीकृष्ण / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

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तदनेनानुषङ्गेण वयमद्य धनंजयम् ॥ १४ ॥ शापेन योजयामेति तथास्त्विति च साब्रवीत् । “भाविनि! ये शान्तनुनन्दन भीष्म संग्राममें दूसरेके साथ उलझे हुए थे। अर्जुनके साथ युद्ध नहीं कर रहे थे तो भी सव्यसाची अर्जुनने इनका वध किया है। इस अपराधके कारण हमलोग आज अर्जुनको शाप देना चाहते हैं।” यह सुनकर गंगाजीने कहा—‘हाँ, ऐसा ही होना चाहिये’ ।। तदहं पितुरावेद्य प्रविश्य व्यथितेन्द्रिया ॥ १५ ॥ अभवं स च तच्छ्रुत्वा विषादमगमत् परम् ।

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