अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)

अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)
Anugita from Mahabharata Ashvamedhika Parva with Commentary
भगवान् श्रीकृष्ण / महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished421 पृष्ठ
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अष्टाशीतितमोऽध्यायः
उलूपी और चित्राङ्गदाके सहित बभ्रुवाहनका रत्न-आभूषण
आदिसे सत्कार तथा अश्वमेध-यज्ञका आरम्भ
वैशम्पायन उवाच स प्रविश्य महाबाहुः पाण्डवानां निवेशनम् । पितामहीमभ्यवन्दत् साम्ना परमवल्गुना ।। १ ।। वैशम्पायनजी कहते हैं— जनमेजय! पाण्डवोंके महलमें प्रवेश करके महाबाहु बभ्रुवाहनने अत्यन्त मधुर वचन बोलकर अपनी दादी कुन्तीके चरणोंमें प्रणाम किया ।। ततश्चित्राङ्गदा देवी कौरव्यस्यात्मजापि च । पृथां कृष्णां च सहिते विनयेनोपजग्मतुः ।। २ ।। इसके बाद देवी चित्रांगदा और कौरव्यनागकी पुत्री उलूपीने भी एक साथ ही विनीत भावसे कुन्ती और द्रौपदीके चरण छुए ।। २ ।। सुभद्रां च यथान्यायं याश्चान्याः कुरुयोषितः ।