अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)

अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)
Anugita from Mahabharata Ashvamedhika Parva with Commentary
भगवान् श्रीकृष्ण / महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished421 पृष्ठ
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'अथवा यदि इन्द्र इच्छानुसार जल बरसानेके लिये की हुई मेरी प्रार्थना पूर्ण नहीं करेंगे तो मैं स्वयं इन्द्र हो जाऊँगा और समस्त प्रजाके जीवनकी रक्षा करूँगा।। यो यदाहारजातश्च स तथैव भविष्यति ॥ २३ ॥ विशेषं चैव कर्तास्मि पुनः पुनरतीव हि। 'जो जिस आहारसे उत्पन्न हुआ है, उसे वही प्राप्त होगा तथा मैं बारंबार अधिक मात्रामें विशेष आहारकी भी व्यवस्था करूँगा।। २३ १/२ ।। अद्येह स्वर्णमभ्येतु यच्चान्यद् वसु किंचन ।। २४ ॥ त्रिषु लोकेषु यच्चास्ति तदिहागम्यतां स्वयम्। 'तीनों लोकोंमें जो सुवर्ण या दूसरा कोई धन है, वह सब आज यहाँ स्वतः आ जाय।। २४ १/२ ।। दिव्याश्चाप्सरसां संघा गन्धर्वाश्च सकिन्नराः ॥ २५ ॥ विश्वावसुश्च ये चान्ये तेऽप्युपासन्तु मे मखम्।