अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)

अनुगीता (महाभारत आश्वमेधिक पर्व - श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद सटीक)
Anugita from Mahabharata Ashvamedhika Parva with Commentary
भगवान् श्रीकृष्ण / महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished421 पृष्ठ
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त्रिंशोऽध्यायः अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना पितर ऊचुः अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् । श्रुत्वा च तत् तथा कार्यं भवता द्विजसत्तम ॥ १ ॥ पितरोंने कहा—ब्राह्मणश्रेष्ठ! इसी विषयमें एक प्राचीन इतिहासका उदाहरण दिया जाता है, उसे सुनकर तुम्हें वैसा ही आचरण करना चाहिये ॥ १ ॥ अलर्को नाम राजर्षिरभवत् सुमहातपाः । धर्मज्ञः सत्यवादी च महात्मा सुदृढव्रतः ॥ २ ॥ पहलेकी बात है, अलर्क नामसे प्रसिद्ध एक राजर्षि थे, जो बड़े ही तपस्वी, धर्मज्ञ, सत्यवादी, महात्मा और दृढ़प्रतिज्ञ थे ॥ २ ॥