भारतकोश
अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

अपराजितपृच्छा (भुवनदेवाचार्य - प्राचीन मन्दिर, प्रासाद, कला एवं वास्तु महाग्रन्थ सटीक)

Aparajitapriccha of Bhuvanadeva with Commentary by Shrikrishna Jugnu

भुवनदेवाचार्य (टीकाकार: डॉ. श्रीकृष्ण 'जुगनू') द्वारा

DevanagariHindipublished535 पृष्ठ

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जलस्रोतादीनां — 367 मेरुच्छन्दवर्णनं — 368 षट् छन्दभेदाः — 368 छन्दस्य पुराख्यानमाह — 369 प्रस्तारक्रमाह — 369 खण्डमेरु वर्णनं — 371 तथा चान्य खण्डमेरु (पताकाच्छन्दश्च) — 371 सूचीछन्दः — 373 अथोद्दिष्टछन्द नष्टच्छन्दश्च — 373 गृहोत्पत्तिहर्म्यादिराजप्रासादर्निर्णयो नामैकोनसप्ततितमं सूत्रम् ॥ 69 ॥ 375-383 घटिकानादोत्पत्ति प्रसङ्गं — 375 आश्रमवास्तु — 376 अथालयमाह — 376 कोष्ठका — 376 छाद्यकं — 376 प्राकारमाह — 377 गृहं — 377 हर्म्यादीनां — 378 प्रासादसञ्ज्ञक हर्म्यवर्णनं — 379 मालिकानि कथ्यते — 380 भूधरादिब्रह्मनगरं सप्ततितमं सूत्रम् ॥ 70 ॥ 383-393 नगरस्य केन्द्रे ब्रह्मप्रासादं — 386 प्रोक्तस्तम्भ च कीर्तिस्तम्भं — 387 तदर्थे मेरुच्छन्दमाह — 389 प्रतिष्ठापनावसरेकर्त्तव्यं — 391 अन्यदप्याह — 392 हेमकूटाख्यनगरप्रमाणमेक-सप्ततितमं सूत्रम् ॥ 71 ॥ 393-398 पदादीनां विन्यासमाह — 394 वसति मार्गादीनां न्यासक्रमोह — 395 रत्नकूट नगरादीनां लक्षणं — 396

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