भारतकोश
आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)

आर्यभटीयम् (आचार्य आर्यभट - परमेश्वर टीका एवं हिन्दी अनुवाद)

Aryabhatiya of Aryabhata with Hindi Commentary

आचार्य आर्यभट (४७६ ई.) / पं. उदयनारायण सिंह द्वारा

DevanagariSanskritpublished134 पृष्ठ

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८४ गीतिकापादः ॥ प्रथमश्चक्रपादो मेषवृषमिथुनाख्यश्चरदलहीनेन दिवसपादेन । चरदलहीना- भिः पञ्चदशघटीभिः । उदयति । अन्त्यश्च मीनघटमृगाख्यस्तथा चरदलहीनाभिः पञ्चदशघटिकाभिरुदयति । अतो मृगादिमिथुनान्तानां षण्णां लङ्कोदयास्तद्राशि- भवचरदलासुभिर्हीनास्स्वदेशोदया भवन्ति । अथान्त्यौ तत्सहितेन । कर्कसिंहक- न्याख्यस्तुलालिचापाख्यश्च चक्रपादौ चरदलसहितेन दिवसपादेनोदयतः । अतः कर्यादिचापान्तानां षण्णां राशीनां लङ्कोदयास्तत्तच्चरदलयुतास्स्वदेशोदया भव- न्ति । क्रमोत्क्रमतः । प्रथमपादे प्रथमराशेर्मेषस्य लङ्कोदये प्रथमराशिभवं चरद्- लं शोध्यम् । वृषस्य द्वितीयस्य लङ्कोदये द्वितीयराशिभवं चरदलं शोध्यम् । तृ- तीयस्य मिथुनस्य लङ्कोदये तृतीयराशिभवं चरदलं शोध्यम् । द्वितीयपादे तूत्क्र- मेण देयम् । कर्कटस्य तृतीयराशिचरदलं देयम् । सिंहस्य द्वितीयराशिचरदलं दे- यम् । कन्यायाः प्रथमराशिचरदलं देयम् । तृतीयपादे क्रमेण देयम् । चतुर्थपाद उत्क्रमेण शोध्यम् । इत्युक्तं भवति । गोलस्योत्तरोन्नतत्वान्मीनादयश्शीघ्रमुद्य- न्ति । अतस्तेषु चरदलं शोध्यम् । तस्मादेव कर्कटादयश्शनैरुद्यन्ति । अतस्तेषु चरदलं देयम् ॥ इष्टकाले शङ्कानयनमाह । भा०:—प्रथम चक्र पाद अर्थात् मेष, वृष, मिथुन नामक है । चरदल हीन द्वारा दिवसपाद से अर्थात् १५ घटिका करके उदय होता है । और अन्त्य अर्थात् मीन, कुम्भ, मकर, नामक पाद है, सो १५ घटिका करके उदय होता है , इसलिये मकर, कुम्भ, मीन, मेष, वृष, मिथुन, इन छः राशियों का उदयास्त १५ प्राण हीघटा करके स्वदेशोदय होता है ॥ और कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, क्रम से प्रथम तीन राशि द्वितीय पाद और दूसरा तीन राशि तृतीय पाद है । १५ घटिका जोड़ने से उदय होता है । अतएव कर्कादि धनु पर्य्यन्त छः राशियों का लङ्कोदय उस उस १५ प्राण के जोड़ने से स्वदेशोदय होता है । प्रथम पाद में प्रथम राशि मेष राशि के लङ्कोदय में प्रथम राशि से उत्पन्न चरदल घटावे । वृष राशि अर्थात् द्वितीय राशि के लङ्कोदय में द्वितीय राशि भव चरदल घटावे । तृतीय मिथुन राशि के लङ्कोदय में तृतीय राशि भव चरदल घटावे । और द्वितीय पाद में कर्कट राशि का तृतीय चरदल जोड़े । सिंह राशि के तृतीय राशि के चरदल जोड़े । चतुर्थ पाद में उत्क्रम करके घटावे । गोल के उत्तर उन्नत होने से मीन आदि राशि शीघ्र उदय होती है, अतएव उन में चरदल घटायी जाता है । और कर्कट आदि राशि धीरे २ उदय होती है इस लिये उन में चरदल जोड़ा जाता है ॥२१॥