अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 158, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंअथयमस्मृतिप्रारंभः
श्रुतिस्मृत्युदितंधर्मं वर्णानामनुपूर्वशः ।
प्राब्रवीदृषिभिःपृष्टो मुनीनामग्रणीर्यमः ॥ १ ॥
योभुंजानोऽशुचिर्वापि चांडालपतितंस्पृशेत् ।
क्रोधादज्ञानतोवापि तस्यवक्ष्यामिनिष्कृतिम् ॥ २ ॥
षड्ररात्रंवात्रिरात्रंवा यथासंख्यंसमाचरेत् ।
स्नात्वात्रिषवणंविप्रः पंचगव्येनशुद्ध्यति ॥ ३ ॥
भुंजानस्यतुविप्रस्य कदाचित्स्रवतेगुदम् ।
उच्छिष्टत्वेऽशुचित्वेच तस्यशौचंवनिर्दिशेत् ॥४॥
पूर्वं कृत्वाद्विजःशौचं पश्चादापउपस्पृशेत् ।
अहोरात्रोषितोभूत्वा पंचगव्येनशुद्ध्यति ॥५॥
निगिरन्यदिमेहेत भुक्त्वावामेहनेकृते ।
अहोरात्रोषितोभूत्वा जुहुयात्सर्पिषाहुतिम् ॥ ६ ॥
यदाभोजनकालेस्या-दशुचिर्ब्राह्मणःक्वचित् ।
चारों वर्णों के श्रुति और स्मृति में कहे धर्म को ऋषियों के पूछने पर मुनियों में मुख्य यम ने क्रम से कहा ॥१॥ जो भोजन करता हुआ अथवा अशुद्ध दशा में पतित चांडाल को क्रोध अथवा अज्ञान से स्पर्श करले उसका प्रायश्चित्त कहते हैं ॥२॥ छः दिन अथवा तीन दिन क्रमशः प्रायश्चित्त करे तीन बार स्नान करके पंचगव्य पीने से ब्राह्मण की शुद्धि होती है ॥३॥ भोजन करते हुए ब्राह्मण की गुदा से मल निकल जाय तो उच्छिष्ट और अशुद्धि के निवारण के लिये शुद्धि करे ॥४॥ प्रथम ब्राह्मण गुद शुद्धि करके जल से स्नान करे और पुनः एक दिन और रात उपवास करके पंचगव्य पीनेसे शुद्ध होता है ॥५॥ भोजन करते हुये अथवा भोजन करके शुद्धि से यदि पेशाब करे तो एक रात्रि दिन उपवास कर घीकी आहुति से होम करे ॥६॥ जो ब्राह्मण भोजन के समय कभी अशुद्ध