अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअत्रिसमृतिः ॥ १२
क्वाथयित्वापिबेदाप-स्त्रिरात्रेणैवशुद्ध्यति ॥ ६२ ॥ सायंप्रातस्तुयःसन्ध्यां प्रमादाद्विक्रमेत्सकृत् । गायत्र्यास्तुसहस्रंहि जपेत्स्नात्वासमाहितः ॥ ६३ ॥ रोगाक्रांताथवाऽस्नातः स्थितःस्नानजपाद्बहिः ॥ ब्रह्मकूर्चं चरेद्भक्त्या दानंदत्वाविशुद्ध्यति ॥ ६४ ॥ गवांशृंगोदकेस्नात्वा महानद्युपसंगमे । समुद्रदर्शनेवापि व्यालदष्टःशुचिर्भवेत् ॥ ६५ ॥ वृकश्वानशृगालैस्तु यदिदष्टस्तुब्राह्मणः । हिरण्योदकसंमिश्रं घृतंप्राश्याविशुद्ध्यति ॥ ६६ ॥ ब्राह्मणीतुशुनीदष्टा जंबुकेनवृकेणवा । उदितंग्रहनक्षत्रं दृष्ट्वासद्यःशुचिर्भवेत् ॥ ६७ ॥ सत्रतस्तुशुनादष्ट-स्त्रिरात्रमुपवासयेत् । सघृतेपावकंप्राश्य व्रतशेषंसमापयेत् ॥ ६८ ॥
हो जाता है ॥ ६२॥ सायं वा प्रातः काल यदि प्रमाद से संध्योपासन को जो त्याग दे तो स्नान कर सावधान होके एक सहस्र गायत्री का जप करे ॥ ६३॥ किसी रोग के कारण रोग जो स्नान न कर सके और स्नान करके जो जप न कर सके वह मनुष्य भक्ति से ब्रह्मकूर्चव्रत कर और दान देकर शुद्ध होता है ॥ ६४ ॥ जिस मनुष्य को सांपने काटा हो वह गौओं के सींगों के जल से अथवा बड़ी नदी गंगा यमुना आदि के संगम में स्नान करके अथवा समुद्र के दर्शन से शुद्ध होता है ॥ ६५ ॥ भेड़िया-कुत्ता और गीदड़ ने जिस ब्राह्मण को काटा हो वह सोने के जल से मिले घीको खाकर शुद्ध होता है ॥ ६६ ॥ जिस ब्राह्मणी को कुत्ती, गीदड़ी अथवा भिड़िया काटे तो वह उदय हुए ग्रह नक्षत्रों के दर्शन करने से शीघ्र ही शुद्ध हो जाती है ॥ ६७ ॥ चान्द्रायणादि व्रतवाला ब्राह्मण कुत्ते के काटने से तीन दिन तक उपवास करे फिर घृत सहित चीते की छाल के चूर्ण को खाकर शेष व्रत को समाप्त करे ॥ ६८ ॥