भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

पृष्ठ 32, कुल 805 में से

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अत्रिस्मृतिः ॥ १५

वपनंमेखलादंडं भैक्षचर्याव्रतानिच । निवर्त्तंतेद्विजातीनां पुनःसंस्कारकर्मणि ॥ ७५ ॥ गृहशुद्धिंप्रवक्ष्यामि अंतःस्थशवदूषिताम् । प्रयोज्यंमृन्मयंभांडं सिद्धमन्नंतथैवच ॥ ७६ ॥ गृहान्निष्क्रम्यतत्सर्वं गोमयेनोपलेपयेत् । गोमयेनोपलिप्यथा छागेनाघ्रापयेत्पुनः ॥ ७७ ॥ ब्राह्मैर्मंत्रैश्चपूतंतु हिरण्यकुशवारिभिः । तेनैवाभ्युक्ष्यतद्देशम शुद्धयतेनात्रसंशयः ॥७८॥ राज्ञाऽन्यैःश्वपचैर्वापि बलाद्विचलितोद्विजः। पुनःकुर्वीतसंस्कारं पश्चात्कृच्छ्रत्रयंचरेत् ॥ ७६ ॥ शुनाचैवस्तुसंस्पृष्ट-स्तस्यस्नानंविधीयते । तदुच्छिष्टंतुसंप्राश्य यत्नेनकृच्छ्रमाचरेत् ॥ ८० ॥ अतःपरंप्रवक्ष्यामि सूतकस्यविनिर्णयम् ।


मुंडन-मेखला तथा-दंड का धारण-भिक्षा का मांगना-और व्रत ये सब काम ( जो यज्ञोपवीत के समय होते हैं ) पुनः संस्कार में नहीं होते किन्तु निवृत्त होजाते हैं ॥ ७५ ॥ भीतर पड़ा है शव ( मुर्दा ) जिस में ऐसे घर की शुद्धि कहते हैं मिट्टी के पात्रों को वर्ते और सिद्ध ( अन्य ने बनाये ) अन्न को अ-लग करे ॥७६॥ घर से बाहर मुर्दे को निकाल कर गोबर से घर को लिपावे और गोबर से लिपा कर बकरा से सुंघावे ( बकरे का मुख शुद्ध होता है ) ॥ ७७ ॥ जिनका देवता ब्रह्मा है ऐसे वेद मंत्रों के पाठ से पवित्र किये घर को सोने और कुशाओं के जल द्वारावेद मन्त्रों से छिड़कने से शुद्ध होता है इस में संश-य नहीं है ॥ ७८ ॥ राजा वा अन्य चांडालादि ने यदि द्विज को बलात्कार धर्म से चलायमान किया हो तो वह द्विज फिर सस्कार करे और पीछे तीन कृच्छ्रव्रत करें ॥ ७६ ॥ जिस को कुत्ते ने छू लिया हो वह स्नान करे और कुत्ते के छूट को खाकर यत्न से कृच्छ्र व्रत करे ॥ ८० ॥ इस से आगे सूतक का निर्णय

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