भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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भाषाधर्मसंहिता ॥ ४७

भस्मनाशुद्ध्यते कांस्यं सुरायायन्नलिप्यते । सुरामात्रेणसंस्पृष्टं शुद्ध्यतेऽग्न्युपलेखनैः ॥ २४ ॥ गवाघ्रातानि कांस्यानि श्वकाकोपहतानि च । शुद्ध्यन्तिदशभिःक्षारैः शूद्रोच्छिष्टानियानि च ॥ २५ गण्डूषंपादशौचं च कृत्वावैकांस्यभाजने । षण्मासान्भुविनिक्षिप्य उद्धृत्यपुनराहरेत् ॥ २६ ॥ आयसेष्वपसारेण सीसस्याग्नौविशोधनम् । दन्तमस्थि तथाशृङ्गं रौप्यंसौवर्णभाजनम् ॥ २७ ॥ मणिपाषाणशंखाश्च एतान्प्रक्षालयेज्जलैः । पाषाणेतु पुनर्धर्ष एषाशुद्धिरुदाहृता ॥ २८ ॥ अद्भिस्तुप्रोक्षणंशौचं बहूनांधान्यवाससाम् । प्रक्षालनेनत्वल्पानामद्भिःशौचंविधीयते ॥ २९ ॥ मृद्भाण्डदहनाच्छुद्धिर्धान्यानांमार्जनादपि । वेणुवल्कलचीराणां क्षौमकार्पासवाससाम् ॥

मदिरा का संसर्ग न हुआ हो ऐसा कांसे का पत्र भस्म से, और जिस में मदि- रा लग गई हो वह अग्नि में तपाने से, और घिसने छीलने से, शुद्ध होता है ॥ २४ ॥ गौ के सूंघे, कुत्ता और कौआ के छूए, और शूद्र ने जिन में खाया हो ऐसे कांसे के पात्र दश खारी वस्तु लगाने से शुद्ध होते हैं ॥ २५ ॥ कांसे के पात्र में कुल्ला करे वा पग धोवे तो उसे छः महीने तक पृथ्वी में गाड़ रक्खे फिर निकाले तब भोजनादि के योग्य शुद्ध होता है ॥२६॥ लोहे के पात्र स्था- नान्तर में कर देने ही से शुद्ध हो जाते हैं । और सीसे के पात्रों की शुद्धि अग्नि में तपाने से होती है । दांत, हड्डी सींग, और चांदी सोने के पात्र मणि, पत्थर-और शंख इनको जलसे धोके शुद्ध करे परन्तु पत्थर के पात्र ॥२७॥ को फिर से घिसे तब शुद्ध होता है ॥२८॥ बहुत से धान्य की राशि तथा बहुत से वस्त्र किसी कारण अशुद्ध हो जांय तो कुशों द्वारा जल छिड़कने से, तथा थोड़े वस्त्र वा धान्य हों तो जल में धोने से शुद्ध होते हैं ॥२९॥ मिट्टी के पात्र की अग्नि में फिर से पकाने पर, अन्नों की मार्जन ( जल सेचन ) से, बांस, बक्कल, चीर (झिरझा कपड़ा ) अलसीके वस्त्र, और कपास के वस्त्र, ऊन और नेत्र ( वेतस्रादि )