भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

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भाषाधर्मसंहिता ॥ १९

पुनराचामेत् ॥३८॥ वासश्च परिधायौष्ठौ च संस्पृश्य यत्राला मकौ न श्मश्रुगतो लेपः ॥३९॥ दन्तवद्दन्तसक्तेषु यच्चान्तर्मुखेभवेत् । आचान्तस्यावशिष्टंस्यान्निगिरन्नेवतच्छुचिः ॥ ४० ॥ परानथाऽऽचामयतः पादौयाविप्रुषोगताः । भूम्यास्तास्तुसमाःप्रोक्तास्ताभिर्नोच्छिष्टभाग् भवेत् ॥४१॥ प्रचरन्नभ्यवहार्य्यपूच्छिष्टंयदिसंस्पृशेत् । भूमौ निक्षिष्यतद्द्रव्यमाचान्तःप्रचरेत्पुनः ॥४२॥ यद्यन्मीमांस्यं स्यात्तत्तदद्भिः संस्पृशेत् ॥ ४३ ॥ श्वहताश्चमृगावन्याः पतितंचखगैःफलम् । बालैरनुपरिक्रान्तं स्त्रीभिराचरितंचयत् ॥ ४४ ॥ प्रसारितंचयत्पण्यं येदोषाःस्त्रीमुखेषुच ।


इन कामों को करके पहिले किया हो तो भी फिर से आचमन करे ॥३८॥ वस्त्र धारण कर, ( बदल के ) तथा जहां बाल नहीं जमते वहां ओठों का स्पर्श करके भी आचमन करे और मूंछों में लगी जूठन वा कफशुद्ध नहीं माना जायगा उस को धोकर भी आचमन करना चाहिये ॥ ३९ ॥ विधि पूर्वक आचमन कर लेने पर दांतों में वा मुख में कहीं खाये हुये शेष अन्नादि का अंश जान पड़े तो उस से वह मनुष्य उच्छिष्ट नहीं माना जायगा किन्तु निगलते ही शुद्ध हो जाता है ॥ ४० ॥ अन्य लोगों को जल पिलाते वा आचमन कराते समय पगों पर जो जल के छींटे पड़ जावें उन को पृथिवी की धूलि के समान कहा है उन से मनुष्य अशुद्ध नहीं होता है ॥४१॥ भोजन करने योग्य पकाये अन्नादि को ले जाते हुये यदि किसी उच्छिष्ट को छूलेवे तो उस भोज्य वस्तु को भूमि पर रख कर आचमन करके फिर लेजावे ॥ ४२ ॥ जिस २ वस्तु के अशुद्ध होने न होने में शंका हो जावे उस २ को शुद्ध जल से स्पर्श वा प्रक्षालन कर लेवे ॥ ४३ ॥ कुत्तों ने मारे वन के मृग, पक्षियों ने उच्छिष्ट करके वृक्षों से गिराये फल, हाथ आदि धोये बिना भी बालकों ने ग्रहण किये-पकड़े भोज्य वस्तु, स्त्रियों ने किये आचरण वा कोई काम, ॥ ४४ ॥ बेंचने के लिये दुकान पर नीच पुरुष ने भी फैलाये पदार्थ, स्त्रियों के मुख में जो दोष हैं, मक्खी तथा मच्छर नील का स्पर्श करके भी जिस भोज्य वस्तु पर बैठ गये