भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

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भाषार्थसहिता ॥ २९

द्वात्रिंशद्गृहस्थस्य अमितंब्रह्मचारिणः ॥ १८ ॥
अनड्वान्ब्रह्मचारीच आहिताग्निश्चतेत्रयः ।
भुञ्जानाएवसिद्ध्यन्ति नैषांसिद्धिरनश्नताम् ॥१९॥
तपोदानोपहारेषु व्रतेषुनियमेषुच ।
इज्याध्ययनधर्मेषु योनाऽऽसक्तःसनिष्क्रियः ॥ २० ॥
योगस्तपोदमोदानं सत्यंशौचंदयाश्रुतम् ।
विद्याविज्ञानमास्तिक्य मेतद्ब्राह्मणलक्षणम् ॥ २१ ॥
येशान्तदान्ताःश्रुतिपूर्णकर्णा जितेन्द्रियाःप्राणिवधान्निवृत्ताः।
प्रतिग्रहेसंकुचिताग्रहस्तास्तेब्राह्मणास्तारयितुंसमर्थाः ॥२२॥
नास्तिकःपिशुनश्चैव कृतघ्नोदीर्घरोषकः ।
चत्वारःकर्मचाण्डाला जन्मतश्चापिपञ्चमः ॥ २३ ॥
दीर्घवैरमसूयाच असत्यंब्रह्मदूषणम् ।


ग्रास और ब्रह्मचारी को अपरिमित ग्रास (जितनी भूख हो) भोजन करना चाहिये ॥ १८ ॥ बैल, ब्रह्मचारी तथा अग्निहोत्री ब्राह्मण ये तीनों भोजन में त्रुटि न करें (अर्थात् अधिक उपवासादि न करें) भोजन करते हुए ही ये तीनों सिद्धि को प्राप्त होते हैं किन्तु लंघन उपवास करते हुए उक्त तीनों की सिद्धि नहीं है ॥ १९ ॥ जो ब्राह्मणादि द्विज तप करने, दान देने, गुरु आदि मान्यों की भेंट पूजा करने, व्रत, नियम, यज्ञ, वेदाध्ययन और अहिंसा दयादि धर्म इनमें से किसी काम में तत्पर नहीं वही निकम्मा है ॥ २० ॥ योगाभ्यास, तप, मनका दमन, दान, सत्यभाषण, शुद्धि, दया, शास्त्राध्ययन, वेदान्त (तत्त्वज्ञान) का अभ्यास, विज्ञान (लौकिक व्यवहार का ज्ञान) आस्तिकता ये सब जिनमें हैं वही ब्राह्मण है अर्थात् योगाभ्यासादि ब्राह्मणत्व के लक्षण नाम चिन्ह हैं ॥ २१ ॥ मन को वशीभूत करनेवाले दान्त, श्रुतियों (वेदों) से जिनके कान भरे गये हों, जितेन्द्रिय, हिंसा से निवृत्त, दान लेने में जिनने हाथ को सकोड़ रक्खा हो ऐसे ब्राह्मण अन्यों को तार देने में समर्थ होते हैं ॥ २२ ॥ नास्तिक, चुगल, कृतघ्न (अपना उपकार करनेवाले की हानि करनेवाला) बहुत कालतक क्रोध को न त्यागनेवाला ऐसे चारो ब्राह्मणादि कर्म से चाण्डाल हैं और पांचवां चाण्डाल जन्म से होता है ॥ २३ ॥ बहुत कालतक बैर रखना, निन्दा करना