अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 799, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभार्गवसंहिता ॥ १०९
भर्तुर्वधोभ्रूणहत्या स्वस्यगर्भस्यपातनम् ॥ ७ ॥
वत्सःप्रस्रवणेमेध्यः शकुनिःफलपातने ।
स्त्रियश्चरतिसंसर्गे श्वामृगग्रहणेशुचिः ॥ ८ ॥
अजाश्वामुखतोमेध्या गावोमेध्यास्तुपृष्ठतः ।
ब्राह्मणाःपादतोमेध्याः स्त्रियोमेध्यास्तुसर्वतः ॥ ९ ॥
सर्ववेदपवित्राणि वक्ष्याम्यहमतःपरम् ॥
येषांजपैश्चहोमैश्च पूयन्तेनात्रसंशयः ॥ १० ॥
अघमर्षणंदेवकृतं शुद्धवत्यस्तरत्समाः ।
कूष्माण्डानिपावमान्यो दुर्गासावित्रिरेवच ॥ ११ ॥
अभीषङ्गाःपदस्तोमाः सामानिव्याहृतीस्तथा ।
भारुण्डानिचसामानि गायत्रंरैवतंतथा ॥ १२ ॥
पुरुषव्रतंन्यासं च तथावेदव्रतानिच ।
हैं जिन के प्रायश्चित्त पूर्व अ० २१ आदि में कहे हैं पर उन में ये तीन बड़े महापाप हैं ) ॥ ७ ॥ गौ के थनों को चोंखने में बछड़े का मुख शुद्ध है, फल गिराने में पक्षी का मुख शुद्ध, शिकार पकड़ने में कुत्ते का मुख शुद्ध और रति सम्बन्ध में स्त्री शुद्ध है ॥ ८ ॥ बकरा बकरी घोड़ा का मुख, गौ के मल-मूत्र स्थान, तथा ब्राह्मणों के पग पवित्र हैं तथा स्त्रियों का सर्वाङ्ग शुद्ध है ॥ ९ ॥ ( स्त्रियां निर्धन पराधीन होने से भी कम दूषित होती हैं बालककृत अपराध बालक को नहीं लगता है ) सब वेदों के पवित्रांश आगे कहते हैं जिन के जप और होमों द्वारा निःसन्देह मनुष्य पवित्र होते हैं ॥ १०॥ ( ऋतं च सत्यं च०) इत्यादि तीन मन्त्र, (देवकृतस्यैनसो०) इत्यादि छः मन्त्र, (एतोन्विन्द्रं०) इत्यादि तीन शुद्धवती ऋचा, ( तरत्समन्दी० ) इत्यादि चार ऋचा, कूष्माण्ड सूक्त, ऋग्वेद का नवम मण्डल पवमान सूक्त, सविता देवता वाली, दुर्गा की ऋचा, अभीषङ्ग-पदस्तोम- ये साम, सातों व्याहृति, भारुण्ड-गायत्र और रैवत साम, ॥११। १२ ॥ पुरुषव्रत, न्यास, वेदव्रत ये साम, छप शब्दवाले, बृहस्पति शब्दवाले मन्त्र वा सूक्त, ( मधुवाता० ) इत्यादि तीन ऋचा (नमस्तेरुद्र० ) इत्यादि शत रुद्रिय, अथर्वशिरः, त्रिसुपर्ण, महाव्रत, गोसूक्त, अश्व-