भारतकोश
अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

Ashtadhyayi Sutrapatha of Maharshi Panini

महर्षि पाणिनि द्वारा

DevanagariSanskritpublished102 पृष्ठ

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पृष्ठ 21

तृतीयाध्याये द्वितीयः पादः २१ ९१ अग्नौ चेः। | ११८ लट् स्मे। ९२ कर्मण्यगन्याख्यायाम्। | ११९ अपरोक्षे च। ९३ कर्मणीनि विक्रियः। | १२० ननौ पृष्टप्रतिवचने। ९४ दृशेः क्वनिप्। | १२१ नन्वोर्विभाषा। ९५ राजनि युधिकृञः। | १२२ पुरि लुङ् चास्मे। ९६ सहे च। | १२३ वर्तमाने लट्। ९७ सप्तम्यां जनेर्डः। | १२४ लटः शतृशानचावप्रथमा- ९८ पञ्चम्यांजातौ। | समानाधिकरणे। ९९ उपसर्गे च सञ्ज्ञायाम्। | १२५ सम्बोधने च। १०० अनौ कर्मणि। | १२६ लक्षणहेत्वोः क्रियायाः। १०१ अन्येष्वपि दृश्यते। | १२७ तौ सत्। १०२ निष्ठा। | १२८ पूङ्यजोः शानन्। १०३ सुयजोङ्ग्वनिप्। | १२९ ताच्छील्यवयोवचनशक्तिषु १०४ जीर्यतेरतृन्। | चानश्। १०५ छन्दसि लिट्। | १३० इङ्धार्योः शत्रकृच्छ्रिणि। १०६ लिटः कानज्वा। | १३१ द्विषोऽमित्रे। १०७ क्वसुश्च। | १३२ सुञो यज्ञसंयोगे। १०८ भाषायां सदवसश्रुवः। | १३३ अर्हः प्रशंसायाम्। १०९ उपेयिवाननाश्वाननूचानश्च। | १३४ आ क्वेस्तच्छीलतद्धर्म- ११० लुङ्। | तत्साधुकारिषु। १११ अनद्यतने लङ्। | १३५ तृन्। ११२ अभिज्ञावचने लृट्। | १३६ अलङ्कृञ्निराकृञ्प्रजनोत्- ११३ न यदि। | पचोत्पतोन्मदरुच्यपत्रप- ११४ विभाषा साकाङ्क्षे। | वृतुवृधुसहचर इष्णुच्। ११५ परोक्षे लिट्। | १३७ णेश्छन्दसि। ११६ हशश्वतोलङ् च। | १३८ भुवश्च। ११७ प्रश्ने चासन्नकाले। | १३९ ग्लाजिस्थश्च क्स्नुः।