भारतकोश
अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

Ashtadhyayi Sutrapatha of Maharshi Panini

महर्षि पाणिनि द्वारा

DevanagariSanskritpublished102 पृष्ठ

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पृष्ठ 32

३२ अष्टाध्यायीसूत्रपाठः ( यतिबोधसहितः ) १०८ वतण्डाच्च। | १३३ ढकि लोपः। १०९ लुक्स्त्रियाम्। | १३४ मातृष्वसुश्च। ११० अश्वादिभ्यः फञ्। | १३५ चतुष्पाद्भ्यो ढञ्। १११ भर्गात्त्रैगर्तें। | १३६ गृष्ट्यादिभ्यश्च। ११२ शिवादिभ्योऽण्। | १३७ राजश्वशुराद् यत्। ११३ अवृद्धाभ्यो नदीमानुषीभ्यस् | १३८ क्षत्राद् घः। तन्नामिकाभ्यः। | १३९ कुलात्खः। ११४ ऋष्यन्धकवृष्णिकुरुभ्यश्च। | १४० अपूर्वपदान्यतरस्यां ११५ मातुरुत्सङ्ख्यासम्भद्रपूर्वायाः। | यड्ढकञौ। ११६ कन्यायाः कनीन च। | १४१ महाकुलादञ्खञौ। ११७ विकर्णशुङ्गच्छगलाद् | १४२ दुष्कुलाड् ढक्। वत्सभरद्वाजात्रिषु। | १४३ स्वसुश्छः। ११८ पीलाया वा। | १४४ भ्रातुर्व्यच्च। ११९ ढक्च मण्डूकात्। | १४५ व्यन्सपत्ने। १२० स्त्रीभ्यो ढक्। | १४६ रेवत्यादिभ्यष्ठक्। १२१ द्व्यचः। | १४७ गोत्रस्त्रियाः कुत्सने ण च। १२२ इतश्चानिञः। | १४८ वृद्धाद् ढक्सौवीरेषु १२३ शुभ्रादिभ्यश्च। | बहुलम्। १२४ विकर्णकुषीतकात्काश्यपे। | १४९ फेश्छ च। १२५ भ्रुवो वुक्च। | १५० फाण्टाहृतिमताभ्यां १२६ कल्याण्यादीनामिनङ्। | णफिञौ। १२७ कुलटाया वा। | १५१ कुर्वादिभ्यो ण्यः। १२८ चटकाया ऐरक्। | १५२ सेनान्तलक्षणकारिभ्यश्च। १२९ गोधाया ढ्रक्। | १५३ उदीचामिञ्। १३० आरगुदीचाम्। | १५४ तिकादिभ्यः फिञ्। १३१ क्षुद्राभ्यो वा। | १५५ कौसल्यकार्मार्याभ्यां च। १३२ पितृष्वसुश्छण्। | १५६ अणो द्व्यचः। | १५७ उदीचां वृद्धादगोत्रात्।