भारतकोश
अष्टाङ्गहृदयम्

अष्टाङ्गहृदयम्

Ashtanga Hridayam

श्रीमद्वाग्भट द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान - निर्मला हिन्दी व्याख्या (डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी) · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली · 1999 (उद्गम)

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विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
रात्रिचर्या४८शोधन की आवश्यकता५९
मनोहर वातावरण४८संशोधन कर्म की प्रशंसा५९
वर्षा ऋतुचर्या४८रसायन, वाजीकरण योगों का प्रयोग६०
शरीर-शुद्धि४८शोधनोत्तर चिकित्सा६०
सैकनीय विहार४९चिकित्सा का फल६०
त्याज्य विहार४९आगन्तुज रोग६१
शरद् ऋतुचर्या४९निजागन्तुज रोगों का निरोध एवं शमन६१
आहार-विधि५०शोधन योग्य ऋतुएँ६२
हंसोदकसेवन-निर्देश५०स्वस्थ रहने के उपाय६२
विहार-विधि५०( ५ ) द्रवद्रव्यविज्ञानीयाध्यायः
अपथ्य-निषेध५०अथ तोयवर्गः
संक्षिप्त ऋतुचर्या५०गंगा का जल६४
रससेवन-निर्देश५२गंगाजल का परिचय६४
ऋतुसन्धि में कर्तव्य५२सामुद्र जल६५
( ४ ) रोगानुत्पादनीयाध्यायःपानीय जल६५
वेगों को न रोकने का निर्देश५४न पीने योग्य जल६५
अपानवायु को रोकने से हानि५४१. नदीजल का वर्णन६६
मलवैगरोधज रोग५५२. नदीजल का वर्णन६६
मूत्रवैगरोधज रोग५५३. नदीजल का वर्णन६६
उक्त रोगों की चिकित्सा५५कूप आदि का जल६७
मूत्रवैगरोधज रोग-चिकित्सा५५जलपान-विधि६७
उदगारवैगरोधज रोग-चिकित्सा५५जलपान का प्रभाव६७
छाँक के वेग को रोकने से हानि५६शीतल जलपान के लाभ६७
छिन्कावेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५६उष्ण जलसेवन के लाभ६८
तृषावेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५६श्रुतशीत एवं बासी जल६८
क्षुधावेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५६मारियल का जल६८
निद्रावेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५६उत्तम एवं अधम जल६८
कासवेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५७अथ क्षीरवर्गः
श्वमशवासवेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५७सामान्य दूध के गुण६८
जुम्भावेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५७गाय के दूध के गुण६९
अश्ववेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५७भैंस के दूध के गुण६९
छर्दिवेगनिरोधज रोग५८बकरी के दूध के गुण६९
छर्दिवेगनिरोधज रोग-चिकित्सा५८ऊँटनी के दूध के गुण७०
शुक्र के वेग को रोकने के कारण उत्पन्न रोग५८मानुषी दूध के गुण७०
शुक्र के वेग को रोकने के कारण उत्पन्नभेड़ी के दूध के गुण७०
रोगों की चिकित्सा५८हथिनी के दूध के गुण७०
वेगरोधी के असाध्य लक्षण५८एकशफ दूध के गुण७०
सामान्य चिकित्सा५९आम-श्रुत दुग्ध-गुण७०
धारणीय वेग५९धारोष्ण दूध के गुण७०