आश्वलायन गृह्यसूत्र (अनाविला टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

आश्वलायन गृह्यसूत्र (अनाविला टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Ashvalayana Grihyasutra Hindi
महर्षि आश्वलायन (टीकाकार: हरदत्त आचार्य) द्वारा
स्रोत: Asvalayana Grihya Sutram with Anavila Commentary by Haradatta (उद्गम)
DevanagariHindipublished292 पृष्ठ
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सूत्रसूची।
| सूत्राणि. | पृष्ठम्. | सूत्राणि. | पृष्ठम्. |
|---|---|---|---|
| अंसावाभिमृशति | ६१ | अथाग्निमुपसमा | ५८ |
| अकुष्ठिपृषत् | २०८ | अथाग्निमुपसमा | १९३ |
| अक्षतधानाः कृत्वा | १०२ | अथाग्नौ जुहो | २०४ |
| अक्षतसक्तूनां नवं | ,, | अथाग्नौ हुतशे | २०५ |
| अगदः सोमेन | १७२ | अथाचमनीयैना | १०० |
| अगमनीयां गत्वा | १५४ | अथातः पञ्चयज्ञाः | १३८ |
| अग्न आयूंषि पवस | १७ | अथातः पार्वण | १९६ |
| अग्नये स्वाहेति | ३५ | अथातोऽध्यायोपा | १४७ |
| अग्निं परिसमूह्य | ७९ | अथातो वास्तुपरी | १२६ |
| अग्निना वा कक्ष | ११४ | अथानवेक्षं प्रत्या | १९१ |
| अग्निमुखा वै देवा | २०५ | अथापराजितायां | १६८ |
| अग्निरिन्द्रः प्रजापति | १४ | अथापराजितायां दि | १९५ |
| अग्निर्मे होता स | ९० | अथापि विज्ञाय | १४६ |
| अग्निवेलायाम् | १९२ | अथाप्यृच उदा | ३ |
| अङ्गुष्ठोपकनिष्ठि | १८० | अथावदानानां | ११६ |
| अत ऊर्ध्वं पतित | ७३ | अथास्मिन्नन्न आसे | १३४ |
| अत ऊर्ध्वमक्षारलव | ८५ | अथास्यै मण्डला | ५६ |
| अत ऊर्ध्वमक्षारालव | ३२ | अथास्यै युग्मेन | ५८ |
| अतो वृद्धो जपति | १६५ | अथास्यै शिखे वि | २७ |
| अथ काम्यानां स्था | १५२ | अथैतानि पात्रा | १७५ |
| अथ खलु यत्र | १० | अथैतां दिशम | १७५ |
| अथ खलूच्चावचा | २२ | अथैतान्युपक | १५७ |
| अथ दधिसक्तून् | १४८ | अथैतैर्वास्तुं परी | १२९ |
| अथ पशुकल्पः | ४४ | अथैनं सारयमा | १६९ |
| अथ पार्वणः स्थाली | ३६ | अथैनच्छमयति | १३४ |
| अथ बलिहरण | ८ | अथैनमन्तर्वेदि | १७७ |
| अथर्षयः | १४४ | अथैनमन्वीक्षेत | १७० |
| अथ व्याधितस्या | १५३ | अथैनान् प्रोक्षति | ३७ |
| अथ शूलगवः | २०८ | अथैनामपराजितायां | २८ |
| अथ श्वोभूतेऽष्टका | ११३ | अथैनामुच्छ्रीयमाणा | १३३ |
| अथ सायंप्रातः | ६ | अथोदङ्ङावृत्य | २१३ |
| अथ स्वस्त्ययनं | ३३ | अथोपविशन्ति | १९५ |
| अथ स्वाध्यायम् | १४१ | अथोपेतपूर्वस्य | ८७ |
| अथ स्वाध्याय | १३९ | अधिके प्रशस्तम् | १३० |