आश्वलायन गृह्यसूत्र (अनाविला टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

आश्वलायन गृह्यसूत्र (अनाविला टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Ashvalayana Grihyasutra Hindi
महर्षि आश्वलायन (टीकाकार: हरदत्त आचार्य) द्वारा
स्रोत: Asvalayana Grihya Sutram with Anavila Commentary by Haradatta (उद्गम)
DevanagariHindipublished292 पृष्ठ
पृष्ठ 44, कुल 292 में से
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| सूत्रम्. | विषयः. |
|---|---|
| ५. | असपिण्डगुरुमृतावप्येवम् । |
| ६. | सपिण्डास्वप्रत्तासु स्त्रीषु त्रिरात्रम् । |
| ७. | महागुरुव्यतिरिक्ताचार्येष्वपि । |
| ८. | समानोदकेष्वपि । |
| ९. | प्रत्तस्त्रीदन्तजातादिष्वेकाहम् । |
षष्ठः खण्डः
| सूत्रम्. | विषयः. |
|---|---|
| १. | अस्थिसञ्चयनकालः । |
| २. | शुभे कुम्भे पुंसोऽस्थिसञ्चयनम् । |
| ३. | अलक्षणे कुम्भे स्त्रिया अस्थिसञ्चयनम् । |
| ४. | संचेतृनियमः । |
| ५. | क्षीरोदकेनायतनप्रोक्षणम् । |
| ६. | अङ्गुष्ठोपकनिष्ठिकाभ्यामस्थ्यादायाशब्दं कुम्भे निधानम् । |
| ७. | आपादत लादस्थ्ना यथाक्रममादानम् । |
| ८. | अस्थिकुम्भस्य गर्ते निक्षेपः । |
| ९. | कपालेन कुम्भमपिधाय जपित्वा पांसुभिरवकीर्य श्मशानात् प्रत्याव्रज्य स्नात्वा प्रेताय श्राद्धदानम् । |
सप्तमः खण्डः ।
| सूत्रम्. | विषयः. |
|---|---|
| १. | पित्रादीनां गुरुजनानामुपर्य्युपरि मरणसम्भवेऽमायां शान्तिकैर्मविधिः । |
| २. | प्रागुदयाद् गृहोपकरणानां पचनामेश्च दक्षिणस्यां दिश्युत्सर्गः । |
| ३. | तमग्निं यत्रकुत्रापि प्रक्षिप्य त्रिःप्रदक्षिणं परिक्रमणम् । |
| ४. | ततः पृष्ठतोऽनवेक्ष्य पुनराव्रज्य स्नात्वा वपनविधिः । |
| ५. | नवानां मणिकादीनामुपकल्पनम् । |
| ६. | अग्निवेलायां समन्त्रमरणेरग्निजननम् । |