अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1003, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे बृहस्पति! हे इंद्र! तुम दोनों ही दिव्य तथा पार्थिव धनों के स्वामी हो. तुम अपनी रक्षक शक्तियों के द्वारा हमारी रक्षा करते हुए हम स्तुति कर्ताओं को धन प्रदान करो. (७) सूक्त-८८ देवता—बृहस्पति यस्तस्तम्भ सहसा वि ज्मो अन्तान् बृहस्पतिस्त्रिषधस्थो रवेण. तं प्रत्नास ऋषयो दीध्यानाः पुरो विप्रा दधिरे मन्द्रजिह्वम्.. (१) जिन बृहस्पति ने अपने घोष से पृथ्वी के छोर को भी स्तंभित किया, प्राचीन ऋषि उन का बारबार ध्यान करते हैं. वे बृहस्पति प्रसन्न करने वाली जिह्वा के स्वामी हैं. विद्वान् ब्राह्मण बृहस्पति को प्रथम स्थान देते हैं. (१) धुनेतयः सुप्रकेतं मदन्तो बृहस्पते अभि ये नस्ततस्रे. पृषन्तं सृप्रमदब्धमूर्वं बृहस्पते रक्षतादस्य योनिम्.. (२) हे बृहस्पति! जो ऋत्विज् तुम्हें हमारी ओर आकर्षित करते हैं उन गमनशील, अहिंसक तथा घृत की बूंदें धारण करने वाले ऋत्विजों की तुम रक्षा करो. (२) बृहस्पते या परमा परावदत आ त ऋतस्पृशो नि षेदुः. तुभ्यं खाता अवता अद्रिदुग्धा मध्व श्रोतन्त्यभितो विरप्शम्.. (३) हे बृहस्पति! मृत का स्पर्श करने वाले ऋत्विज् तुम्हारी रक्षा साधनों वाली महान रक्षा के निमित्त बैठे हुए, पर्वतों से एकत्र किए हुए उत्तम मधु की तुम पर वर्षा करते हैं. (३) बृहस्पतिः प्रथमं जायमानो महो ज्योतिषः परमे व्योमन्. सप्तास्यस्तुविजातो रवेण वि सप्तरश्मिरधमत् तमांसि.. (४) बृहस्पति महान ज्योतिष चक्र से परम व्योम में आविर्भूत अर्थात् प्रकट होते हैं. वे बृहस्पति सप्त रश्मि वाले बन कर अंधकार को मिटा देते हैं. (४) स सुष्टुभा स ऋक्वता गणेन वलं रुरोज फलिगं रवेण. बृहस्पतिरुस्रिया हव्यसूदः कनिक्रदद् वावशतीरुदाजत्.. (५) ऋचा वाले गणों के द्वारा वे बृहस्पति मेघों को चीरते हैं. वे हव्य से प्रेरित हो कर इच्छा करने वाली गायों को प्राप्त होते हैं और बारबार शब्द करते हैं. (५) एवा पित्रे विश्वदेवाय वृष्णे यज्ञैर्विधेम नमसा हविर्भिः. बृहस्पते सुप्रजा वीरवन्तो वयं स्याम पतयो रयीणाम्.. (६) हे बृहस्पति! हम सुंदर और वीर संतानों से संपन्न धन के स्वामी बनें. हम उन बृहस्पति ebook converter DEMO Watermarks*