भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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वस्तुओं को पाने के लिए तुम्हारे आश्रय में आया हूं, उन वस्तुओं को मुझे प्रदान करो. (२) इन्द्रमिद् देवतातय इन्द्रं प्रयत्य ध्वरे. इन्द्रं समीके वनिनो हवामह इन्द्रं धनस्य सातये.. (३) हम इंद्र की सेवा करने वाले हैं. संग्राम उपस्थित होने पर हम धन प्राप्ति के लिए इंद्र को बुलाते हैं. (३) इन्द्रो मह्ना रोदसी पप्रथच्छव इन्द्रः सूर्यमरोचयत्. इन्द्रे ह विश्वा भुवनानि येमिरे इन्द्रे सुवानास इन्दवः.. (४) इंद्र ने सूर्य को तेजोमय तथा आकाश और पृथ्वी को अपनी महिमा से विस्तृत किया है. इन इंद्र ने सब भुवनों को अपने आश्रय में लिया है. ये सोमरस इंद्र के लिए निष्पन्न किए जाते हैं. (४) सूक्त-११९ देवता—इंद्र अस्तावि मन्म पूर्व्यं ब्रह्मेन्द्राय वोचत. पूर्वीर्ऋतस्य बृहतीरनूषत स्तोतुर्मेधा असृक्षत.. (१) हे ऋत्विजो! मैं ने प्राचीन स्तोत्र के द्वारा इंद्र की स्तुति की है. अब तुम भी यज्ञ की प्राचीन ऋचाओं से इन की स्तुति करो. स्तोताओं की बुद्धि मंत्रों से संपन्न हो गई है. (१) तुरण्यवो मधुमन्तं घृतश्चुतं विप्रासो अर्कमानृचुः. अस्मे रयिः पप्रथे वृष्ण्यं शवोऽस्मे सुवानास इन्दवः.. (२) इस यजमान का धन बढ़ता है और इस के लिए बल प्राप्त होता है. इंद्र के लिए सोमरस सिद्ध किया जाता है. शीघ्रता करने वाले ब्राह्मण पूजा संबंधी मंत्रों से इंद्र की प्रशंसा करते हैं. (२) सूक्त-१२० देवता—इंद्र यदिन्द्र प्रागपागुदङन्य ग्वा हूयसे नृभिः. सिमा पुरू नृषूतो अस्यानवे ऽ सि प्रशर्ध तुर्वशे.. (१) हे इंद्र! तुम चारों दिशाओं में स्थित मनुष्यों के द्वारा बुलाए जाते हो. तुम शत्रुओं का पूर्ण रूप से नाश कर देते हो. तुम इस यजमान के यज्ञ में आओ. (१) यद्वा रुमे रुशमे श्यावके कृप इन्द्र मादयसे सचा. कण्वासस्त्वा ब्रह्मभि स्तोमवाहस इन्द्रा यच्छन्त्या गहि.. (२)