अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1036, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंकार्य में प्रकट होना सुगम नहीं होता. इसलिए मैं इस के शीश को शब्द वाला बनाता हूं. इस प्रकार इंद्र सब से उत्कृष्ट हैं. (५) न मत्स्त्री सुभसत्तरा न सुयाशुतरा भुवत्. न मत् प्रतिच्यवीयसी न सक्थ्युद्यमीयसी विश्वस्मादिन्द्र उत्तर:.. (६) मेरी पत्नी से अधिक न कोई स्त्री सौभाग्य वाली है और न कोई अधिक सुखी तथा उत्तम संतान वाली है. कोई स्त्री उससे अधिक अपने पति को सुख देने वाली भी नहीं है. (६) उवे अम्ब सुलाभिके यथेवाङ्ग भविष्यति. भसन्मे अम्ब सक्थि मे शिरो मे वी व हृष्यति विश्वस्मादिन्द्र उत्तर:.. (७) हे माता! मेरा शीश, कमर और टांगें पक्षी के समान फड़क रहे हैं. जैसा होना है, वैसा ही हो. इंद्र सब से उत्कृष्ट हैं. (७) किं सुबाहो स्वङ्गुरै पृथुष्टो पृथुजाघने. किं शूरपत्नि नस्त्वमभ्य मीषि वृषाकपिं विश्वस्मादिन्द्र उत्तर:.. (८) हे शूर की पत्नी! तू सुंदर भुजाओं, सुंदर उंगलियों, पृथु नितंबों तथा मोटी जांघों वाली है. वृषाकपि के सामने तू हमारी हिंसा क्यों करती है? इंद्र सब से उत्कृष्ट हैं. (८) अवीरामिव मामयं शरारुरभि मन्यते. उताहमस्मि वीरिणीन्द्रपत्नी मरुत्सखा विश्वस्मादिन्द्र उत्तर:.. (९) यह अनिष्टकारी पुरुष मुझे वीर रहित मान रहा है. मैं शूर की पत्नी हूं. मेरे पति मरुद्गण के मित्र हैं. इंद्र सब की अपेक्षा श्रेष्ठ हैं. (९) संहोत्रं स्म पुरा नारी समनं वाव गच्छति. वेधा ऋतस्य वीरिणीन्द्रपत्नी महीयते विश्वस्मादिन्द्र उत्तर:.. (१०) यज्ञ में नारी पुरुष के साथ सहयोगिनी के रूप में बैठती है. इस प्रकार वह यज्ञ की रचना करने वाली है. वह वीर पत्नी इंद्राणी की स्तुति के योग्य है, क्योंकि इंद्र श्रेष्ठ हैं. (१०) इन्द्राणीमासु नारिषु सुभगामहमश्रवम्. नह्य स्या अपरं चन जरसा मरते पतिर्विश्वस्मादिन्द्र उत्तर:.. (११) मैं इंद्राणी को अत्यधिक सौभाग्यशालिनी मानता हूं. इस का कारण इन के पति का अमर होना है. इंद्राणी के पति वृद्ध भी नहीं होते. अन्य नारियों के पति मरने वाले हैं. (११) नाहमिन्द्राणि रारण सख्युर्वृषाकपेर्ऋते. यस्येदमप्यं हविः प्रियं देवेषु गच्छति विश्वस्मादिन्द्र उत्तर:.. (१२) ebook converter DEMO Watermarks*