अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1049, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंतद् वात उन्मथायति.. (४) वह वायु को उखाड़ता है. (४) कुलायं कृणवादिति.. (५) घौंसला बनाता है. (५) उग्रं वनिषदाततम्.. (६) विस्तृत उग्र की सेवा करता है. (६) न वनिषदनाततम्.. (७) जिस का विस्तार नहीं है, उस की सेवा नहीं करता. (७) क एषां कर्करी लिखत्.. (८) इन में से कौन कर्करी को लिखता है. (८) क एषां दुन्दुभिं हनत्.. (९) इन में दुदुंभि राक्षस को किस ने मारा. (९) यदीयं हनत् कथं हनत्.. (१०) यदि यह वध करती है तो किस प्रकार करती है. (१०) देवी हनत् कुहनत्.. (११) देवी ने वध किया, बुरी तरह वध किया. (११) पर्यागारं पुनः पुनः.. (१२) निवास स्थान के चारों ओर बारबार शब्द करती है. (१२) त्रीण्युष्ट्रस्य नामानि.. (१३) ऊंट के तीन नाम हैं. (१३) हिरण्यं इत्येके अब्रवीत्.. (१४) कुछ लोगों ने हिरण्य, ऐसा कहा. (१४) ebook converter DEMO Watermarks*