अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 119, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंमृत्यु से रक्षा करने में समर्थ और मित्रवत् सब के उपकारी मित्र देवता अर्थात् सूर्य वसंत आदि ऋतुओं के द्वारा हमारी आयु को दीर्घ करने में समर्थ हों. वे अपनी किरणों से पृथ्वी को व्याप्त करें. सूर्य देव के आगमन के पश्चात वरुण, वायु और अग्नि हमें शासन करने योग्य विशाल राज्य प्रदान कराएं (१) धाता रातिः सवितेदं जुषन्तामिन्द्रस्त्वष्टा प्रति हर्यन्तु मे वचः. हुवे देवीमदितिं शूरपुत्रां सजातानां मध्यमेषा यथासानि.. (२) सब के विधाता धाता देव, दानशील अर्यमा और सब के प्रेरक सविता देव मेरी हवि ग्रहण करें. इन के साथसाथ इंद्र और त्वष्टा देव भी मेरी स्तुतियां सुनें. मैं वीर पुत्रों की माता अदिति का आह्वान करता हूं, जिस से मैं अपने समान व्यक्तियों में सम्मान पा सकूं. (२) हुवे सोमं सवितारं नमोभिर्विश्वानदित्याँ अहमुत्तरत्वे. अयमग्निदीदायद् दीर्घमेव सजातैरृद्धो ऽ प्रतिब्रुवद्भिः.. (३) मैं यजमान को श्रेष्ठ पद प्राप्त करने के लिए सोम का, सविता का तथा समस्त अदिति पुत्रों का नमस्कारात्मक मंत्रों के द्वारा आह्वान करता हूं. सब के आधारभूत अग्नि देव अपनी दीप्ति बढ़ाएं. मैं अपने अनुकूलवर्ती बंधु बांधवों के साथ चिरकाल तक श्रेष्ठता प्राप्त करूं. (३) इहेदसाथ न परो गमाथेर्यो गोपाः पुष्टपतिर्व आजत्. अस्मै कामायोप कामिनीर्विश्वे वो देवा उपसंयन्तु.. (४) हे कामिनियो! तुम सब कन्या के समीप ही रहो. इस के सामने से दूर मत जाओ. मार्ग की प्रेरणा देने वाले एवं पालन कर्ता पूषा देव तुम्हें प्रेरणा दें. इस वर की इच्छा पूर्ति के लिए विश्वे देव तुझ कामना करने वाली स्त्री को उस के समीप जाने की प्रेरणा दें. (४) सं वो मनांसि सं व्रता समाकूतीर्नमामसि. अमी ये विव्रता स्थन तान् वः सं नमयामसि.. (५) हे हमारे विरोधी जनो! हम तुम्हारे चित्तों, कर्मों और संकल्पों को अपने अनुकूल बनाते हैं. इन में जो नियमों के विरुद्ध काम करने वाले हों, उन्हें हम तुम्हारे सामने ही दंड दें. (५) अहं गृभ्णामि मनसा मनांसि मम चित्तमनु चित्तेभिरेत. मम वशेषु हृदयानि वः कृणोमि मम यातमनुवर्त्मान एत.. (६) हे मेरे विरोधी जनो! मैं अपने मन के द्वारा तुम सब के मनों को और अपने चित्त के द्वारा तुम सब के चित्तों को अपने वश में करता हूं. आओ और तुम सब भी अपने हृदयों को मेरे वश में करो. तुम सब भी मेरी इच्छा के अनुसार मेरा अनुगमन करो और मेरे अनुकूल बनो. (६) ebook converter DEMO Watermarks*