अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 132, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंअंकुर उगने योग्य इस जुते हुए खेत में गेहूं, जौ आदि बीजों को बोओ. हमारे अन्न के पौधे दानों के भार वाले हों. शीघ्र ही वे पौधे पक कर दरांती का स्पर्श पाने योग्य हो जाएं. (२) लाङ्गलं पवीरवत् सुशीमं सोमसत्सरु. उदिद् वपतु गामविं प्रस्थावद् रथवाहनं पीबरीं च प्रफर्व्यम्.. (३) लोहे के फाल वाला हल कृषि योग्य खेत को सुख देता है. गेहूं, जौ आदि धान्य की उत्पत्ति का कारण होने से यह हल सोमयाग का कर्ता है. हल का भाग फाल भूमि के भीतर रह कर गति करता है. यह हल गाय आदि पशुओं की समृद्धि का कारण बने. (३) इन्द्रः सीतां नि गृह्णातु तां पूषाभि रक्षतु. सा नः पयस्वती दुहामुत्तरामुत्तरां समाम्.. (४) इंद्र हल द्वारा खेत में बनाई गई रेखा अर्थात् कूंड़ को ग्रहण करें तथा पूषा देव उस की रक्षा करें. हल से जुती हुई भूमि हमें अभिमत फल देने वाली बन कर सभी वर्षों में जौ, गेहूं आदि अन्न दे. (४) शुनं सुफाला वि तुदन्तु भूमिं शुनं कीनाशा अनु यन्तु वाहान्. शुनासीरा हविषा तोशमाना सुपिप्पला ओषधीः कर्तमस्मै.. (५) सुंदर फाल अर्थात् हल के लोहे वाले भाग हमें सुख देते हुए भूमि को जोतें. किसान हमें सुख देते हुए बैलों के पीछे चलें. हे सूर्य और वायु! तुम हमारे द्वारा दिए गए हवि से संतुष्ट होते हुए इस यजमान के लिए जौ, गेहूं आदि के पौधों को शोभन बालियों से युक्त करो. (५) शुनं वाहाः शुनं नरः कृषतु लाङ्गलम्. शुनं वरत्रा बध्यन्तां शुनमष्ट्रामुदिङ्गय.. (६) बैल और किसान सुखपूर्वक हल जोतें. हल सुखपूर्वक धरती को फाड़े. रस्सियां सुखपूर्वक बांधी जाएं. हे शुनः अर्थात् वायु देव! तुम बैलों के हांकने के लिए प्रयुक्त होने वाले चाबुक को सुखपूर्वक प्रेरणा दो. (६) शुनासीरेह स्म मे जुषेथाम्. यद् दिवि चक्रथुः पयस्तेनेमामुप सिञ्चतम्.. (७) हे सूर्य और वायु देव! तुम इस खेत में मेरा हवि ग्रहण करो. सूर्य और वायु दोनों ने आकाश में बादलों के रूप में जो जल पहुंचाया है, उस से वर्षा के रूप में इस जुती हुई भूमि को सींचों. (७) सीते वन्दामहे त्वार्वाची सुभगे भव. यथा नः सुमना असो यथा नः सुफला भुवः.. (८) ebook converter DEMO Watermarks*