अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 148, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंअविस्तस्मात् प्र मुञ्चति दत्तः शितिपात् स्वधा.. (१) दक्षिण दिशा के आकाश में दिखाई देने वाले यमराज के सभासद दुष्टों को दंड दें और धर्मात्माओं का पालन करने में युक्त हों. श्रुतियों में बताए गए यज्ञ आदि और स्मृतियों में बताए गए वापी, कूप, सरोवर आदि कर्मों के जो सोलह पाप होते हैं, उन्हें यमराज के सभासद पुण्य से पृथक् करते हैं. उस पाप से यज्ञ में बलि के रूप में दी गई यह सफेद पैरों वाली भेड़ हमें मुक्त करे. यह भेड़ यमराज के सभासदों के लिए अग्नि हो. (१) सर्वान् कामान् पूरयत्याभवन् प्रभवन् भवन्. आकूतिप्रो ऽ विर्दत्तः शितिपात्नोप दस्यति.. (२) चारों दिशाओं को व्याप्त करने वाला, फल देने में समर्थ एवं वृद्धि करने वाला यह यज्ञ हमारी सभी अभिलाषाओं को पूर्ण करता है. संकल्पों को पूर्ण करने वाली यह सफेद पैरों वाली भेड़ इस यज्ञ में दी जा रही है. यह क्षीण न हो कर हमारी इच्छा के अनुसार बढ़ेगा ही. (२) यो ददाति शितिपादमविं लोकेन संमितम्. स नाकमभ्यारोहति यत्र शुल्को न क्रियते अबलेन बलीयसे.. (३) जो यजमान सफेद पैरों वाली एवं लोक विश्वास के अनुसार फल देने वाली भेड़ का दान करता है, वह स्वर्ग को प्राप्त करता है. स्वर्गलोक में निर्बल व्यक्ति सबल का शासन मान कर शुल्क नहीं देता. (३) पञ्चापूपं शितिपादमविं लोकेन संमितम्. प्रदातोप जीवति पितॄणां लोकेऽक्षितम्.. (४) जिस भेड़ के चारों पैरों और नाभि पर पांच पूए रखे जाते हैं, उसे पंचापूप कहते हैं. पंचापूप अर्थात् पांच पूओं वाली और सफेद पैरों वाली भेड़ का दाता पृथ्वी आदि लोकों के पांच समान पितरों के लोक में समाप्त न होने वाला फल भोगता है. (४) पञ्चापूपं शितिपादमविं लोकेन संमितम्. प्रदातोप जीवति सूर्यामासयोरक्षितम्.. (५) पंचापूप अर्थात् पांच पूओं वाली और सफेद पैरों वाली भेड़ को लोक विश्वास के अनुसार दान करने वाला सूर्य और चंद्रमा के लोकों में समाप्त न होने वाला फल भोगता है. (५) इरेव नोप दस्यति समुद्र इव पयो महत्. देवौ सवासिनाविव शितिपात्नोप दस्यति.. (६) ebook converter DEMO Watermarks*