अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें११२. अग्नि की स्तुति १-३ ११३. पूषा देव की स्तुति १-३ ११४. अग्नि और अदिति पुत्र देवों की प्रशंसा १-३ ११५. विश्वे देव की स्तुति १-३ पाप से छुटकारे का आग्रह २ ११६. विवस्वान की स्तुति १-३ क्रोध शांत हो ३ ११७. अग्नि की स्तुति १-३ ऋण की वापसी २ ११८. उग्रंपश्या एवं उग्रजिता अप्सराओं की स्तुति १-३ पाप ऋण से मुक्ति की कामना २ ११९. वैश्वानर अग्नि की स्तुति १-३ लौकिक और दैविक ऋणों रूप फंदों को ढीला करना २ १२०. अग्नि की स्तुति १-३ पृथ्वी, अदिति, अंतरिक्ष तथा आकाश का वर्णन २ स्वर्ग में अपने माता, पिता तथा पुत्रों से मिलना ३ १२१. बंधन के देवता निर्ऋति की स्तुति १-४ बंधनों से मुक्ति की कामना २ १२२. विश्वकर्मा की स्तुति १-५ अग्नि की स्तुति ४ इंद्र से अभिलाषा पूरी करने की कामना ५ १२३. स्वर्ग में विराजमान देवों की स्तुति १-५ पितरों का वर्णन ३ यज्ञ करना और दान देना ४ सोम से स्वर्ग में स्थित रहने की प्रार्थना ५ १२४. अग्नि की स्तुति १-३ जल वृक्ष का फल ही है २ १२५. वनस्पति की स्तुति १-३ वृक्ष से प्राप्त रस का वर्णन २ दिव्य गुणों से युक्त रथों की तुलना ३ १२६. दुंदुभि की स्तुति १-३ दुंदुभि से बल को बढ़ाने के लिए प्रार्थना २ इंद्र की प्रशंसा ३ १२७. विसर्प व्याधि ओषधि का वर्णन १-३ पीपुद्र नाम की ओषधि का वर्णन २ १२८. शंकधूम और चंद्रमा की स्तुति १-४ १२९. भग देव की प्रशंसा १-३ १३०. माष नाम की जड़ीबूटी का वर्णन १-४ ebook converter DEMO Watermarks*