भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 176, कुल 1063 में से

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तेरे घोष से वर्षा होने लगे. वर्षा के जल से भरे हुए सरोवर के मध्य में तू अपने चारों पैरों को उछलने के अनुसार फैला कर छलांग लगा. (१४) खण्वखा ३ इ खैमखा ३ इ मध्ये तदुरि. वर्ष वनुध्वं पितरो मरुतां मन इच्छत.. (१५) हे खंडख, हे खेमख और हे तादुरी नामक मेढकियो! तुम तालाब के मध्य में रह कर अपने घोष से हमें वर्षा प्रदान करो. हे हमारे पालनकर्ता मंडूको! तुम अपने घोष से वायु का मन वश में कर लो. (१५) महान्तं कोशमुदचाभि षिञ्च सविद्युतं भवतु वातु वातः. तन्वतां यज्ञं बहुधा विसृष्टा आनन्दिनीरोषधयो भवन्तु.. (१६) हे पर्जन्य! तुम सागर से विशाल मेघ का उद्धार करो तथा मेघ की वर्षा से सारी धरती को सींचो. तुम उस मेघ को बिजली वाला बनाओ. हवा वर्षा के अनुकूल चले तथा हवा वर्षा के अनुकूल हो. वर्षा के द्वारा अनेक प्रकार से प्रेरित जल यज्ञ का विस्तार करे. जौ, गेहूं आदि फसलें वर्षा के जल से हर्षित हों. (१६) सूक्त-१६ देवता—वरुण बृहन्नेषामधिष्ठाता अन्तिकादिव पश्यति. यस्तायन्मन्यते चरन्त्सर्वं देवा इदं विदुः.. (१) महान वरुण इन शत्रुओं का नियंत्रण करते हुए इन के सभी अन्यायी जनों को समीप से देखते हैं. वरुण जगत् की स्थावर एवं जंगम सभी वस्तुओं को जानते हैं. अतींद्रिय ज्ञान के कारण देवगण स्थिर और नश्वर सभी तत्त्वों को जानते हैं. (१) यस्तिष्ठति चरति यश्च वञ्चति यो निलायं चरति यः प्रतङ्कम्. द्वौ संनिषद्य यन्मन्त्रयेते राजा तद् वेद वरुणस्तृतीयः.. (२) जो शत्रु सामने खड़ा होता है, जो चलता है, जो कुटिलतापूर्वक ठगता है, जो छिप कर प्रतिकूल आचरण करता है तथा जो शत्रु कष्टमय जीवन पा कर विरोध करता है, महान वरुण इन सभी शत्रुओं को समय से देखते हैं. दो व्यक्ति एकांत में बैठ कर जो गुप्त मंत्रणा करते हैं, उसे राजा वरुण तीसरे के रूप में जानते हैं. (२) उतेयं भूमिर्ररुणस्य राज्ञ उतासौ द्यौर्बृहती दूरेअन्ता. उतो समुद्रौ वरुणस्य कुक्षी उतास्मिन्नल्प उदके निलीनः.. (३) यह भूमि भी दुष्टों का निग्रह करने वाले स्वामी वरुण के वश में रहती है. समीप और दूर तक फैली हुई धरती भी उन्हीं के अधिकार में है. पूर्व और पश्चिम में वर्तमान सागर वरुण की ebook converter DEMO Watermarks*

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