अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 194, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंययोर्वधान्नापपद्यते कश्चनान्तर्देवेषूत मानुषेषु. यावस्येशाथे द्विपदो यौ चतुष्पदस्तौ नो मुञ्चतमंहसः.. (५) जिन भव और शर्व के हनन साधन आयुधों से देवों और मनुष्यों के मध्य कोई नहीं बचता तथा जो इस विश्व के दो पैरों वाले मनुष्यों और चार पैरों वाले पशुओं के स्वामी हैं, वे हमें पाप से बचाएं. (५) यः कृत्याकृन्मूलकृद् यातुधानो नि तस्मिन् धत्तं वज्रमुग्रौ. यावस्येशाथे द्विपदो यौ चतुष्पदस्तौ नो मुञ्चतमंहसः.. (६) हे भव और शर्व! जो शत्रु कृत्या राक्षसी के द्वारा दूसरों का विनाश करता है एवं जो राक्षस वंशवृद्धि के मूल आधार संतान का विनाश करता है, इन दोनों प्रकार के शत्रुओं पर अपना वज्र छोड़ो. जो भव और शर्व इस विश्व के दो पैरों वाले मनुष्यों और चार पैरों वाले पशुओं के स्वामी हैं, वे हमें पाप से बचाएं. (६) अधि नो ब्रूतं पृतनासूग्रौ सं वज्रेण सृजतं यः किमीदी. स्तौमि भवाशर्वौ नाथितो जोहवीमि तौ नो मुञ्चतमंहसः.. (७) हे पराजित न होने वाले भव और शर्व! हमारे विषय में पक्षपात के वचन कहो एवं संग्रामों में हमारे बल को पराजित न होने वाला बनाओ. मैं द्यावा और पृथ्वी की स्तुति करता हूं. मुझे पाप से छुड़ाएं. (७) सूक्त-२९ देवता—मित्र, वरुण मन्वे वां मित्रावरुणावृतावृधौ सचेतसौ द्रुह्वणो यौ नुदेथे. प्र सत्यावानमवथो भरेषु तौ नो मुञ्चतमंहसः.. (१) हे ऋत् अर्थात् सत्य, जल अथवा यज्ञ को बढ़ाने वाले एवं समान ज्ञान वाले मित्र और वरुण! मैं तुम दोनों के महत्त्व की स्तुति करता हूं. तुम द्रोह करने वालों का हनन कर देते हो. तुम सत्यप्रतिज्ञ पुरुष की संग्राम में रक्षा करते हो. ऐसे मित्र और वरुण मुझे पाप से बचाएं. (१) सचेतसौ द्रुह्वणो यौ नुदेथे प्र सत्यावानमवथो भरेषु. यौ गच्छथो नृचक्षसौ बभ्रुणा सुतं तौ नो मुञ्चतमंहसः.. (२) हे समान ज्ञान वाले मित्र और वरुण! तुम दोनों द्रोह करने वालों का पतन करते हो और सत्यप्रतिज्ञ जनों की युद्ध में रक्षा करते हो. तुम दोनों पीले रंग के रथ के द्वारा चल कर निचोड़े गए सोमरस को प्राप्त करते हो एवं मनुष्यों के कर्मों के साक्षी हो. तुम दोनों हमें पाप से बचाओ. (२) ebook converter DEMO Watermarks*