अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 216, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रसन्न रहते हैं. (१) वावृधानः शवसा भूर्योजाः शत्रुर्मासाय भियसं दधाति. अव्यनच्च व्यनच्च सस्नि सं ते नवन्त प्रभृता मदेषु.. (२) बढ़ता, शक्तिशाली एवं ओजस्वी शत्रु अपने दासों को भयभीत करता है. चर और अचर सारा विश्व हम में लीन हो जाता है. वेतन पाने वाले सच्चे वीर युद्ध में परमात्मा की प्रार्थना करते हैं. (२) त्वे क्रतुमपि पृञ्चन्ति भूरि द्विर्यद्ते त्रिर्भवन्त्यूमाः. स्वादोः स्वादीयः स्वादुना सृजा समदः सु मधु मधुनाभि योधीः.. (३) हे इंद्र! जन्म, संस्कार और युद्ध की दीक्षा से तीन बातें मनुष्य के जन्म के साथ ही निश्चित हो जाती हैं एवं विशाल यज्ञ को तुम तक पहुंचाती हैं. तुम सभी पदार्थों को उत्तम स्वाद वाला बनाने वाले हो तुम हमारे पदार्थों को भी स्वादिष्ट बनाओ एवं सुंदर रीति से युक्त करो. (३) यदि चिन्नु त्वा धना जयन्तं रणेरणे अनुमदन्ति विप्राः. ओजीयः शुष्मिन्त्स्थिरमा तनुष्व मा त्वा दभन् दुरेवासः कशोकाः.. (४) हे बलशाली इंद्र! तुम सभी युद्धों में विजय प्राप्त करते हो. यदि ब्राह्मण तुम्हारी स्तुति करें तो तुम उन्हें स्थिर रहने वाला बल प्रदान करो. जो मुख्य सुखमय वातावरण को दुःखमय बना देते हैं अथवा जिन की गति बुरी है, वे तुम तक न आ सकें. (४) त्वया वयं शाशदमहे रणेषु प्रपश्यन्तो यधेन्यानि भूरि. चोदयामि त आयुधा वचोभिः सं ते शिशामि ब्रह्मणा वयांसि.. (५) हे इंद्र! तुम्हारी सहायता से हम युद्ध में अपने सभी विरोधियों को समाप्त कर देते हैं. मैं तपस्या द्वारा सिद्ध अपनी वाणी से तुम्हारे शस्त्रों को प्रेरणा प्रदान करता हूं तथा तुम्हारी गतिशील वाणी को तीखा बनाता हूं. (५) नि तद् दधिषेऽवरे परे च यस्मिन्नाविथावसा दुरोणे. आ स्थापयत मातरं जिगत्नुमत इन्वत कर्वराणि भूरि.. (६) जिस घर में उत्तम एवं साधारण प्राणियों का पालन हुआ तथा जिस घर में अन्न द्वारा उन की रक्षा की गई, उस घर में कालिका माता की गतिशील शक्ति की स्थापना करो. इस प्रकार वह घर अद्भुत पदार्थों से पूर्ण हो जाएगा. (६) स्तुष्व वर्मन् पुरुवर्त्मानं समृभ्वाणमिनतममाप्तमाप्त्यानाम्. आ दर्शति शवसा भूर्योजाः प्र सक्षति प्रतिमानं पृथिव्याः.. (७) ebook converter DEMO Watermarks*