अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 221, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंजो तुझे पीता है, वह जीवित रहता है. तू पुरुष की रक्षा करती है, तू मनुष्यों का भरणपोषण करने वाली एवं उन्नत बनाने वाली है. (२) वृक्षंवृक्षमा रोहसि वृषण्यन्तीव कन्यला. जयन्ती प्रत्यातिष्ठन्तीस्परणी नाम वा असि.. (३) तू बैल की इच्छा करने वाली गाय के समान प्रत्येक वृक्ष पर चढ़ती है. तू विजय प्राप्त करती है एवं स्थित रहती है, इसलिए तेरा नाम स्मरणी है. (३) यद् दण्डेन यदिष्वा यद् वारुर्हरसा कृतम्. तस्य त्वमसि निष्कृतिः सेमं निष्कृधि पूरुषम्.. (४) हे लाख! जो डंडे से चोट खाया है और जो धारदार शस्त्र से घायल है, तू उन के घावों को ठीक करने का उपाय है, इसलिए तू इस पुरुष को घावविहीन बना. (४) भद्रात् प्लक्षान्निस्तिष्ठस्यश्वत्थात् खदिराद् धवात्. भद्रान्न्यग्रोधात् पर्णात् सा न एह्यरुन्धति.. (५) हे लाख! तू कदंब, पाकड़, पीपल, खैर, धौ, भद्र, न्यग्रोध एवं पर्ण नामक वृक्षों से उत्पन्न होती है. हे घाव को शुद्ध करने वाली एवं भरने वाली ओषधि लाख! तू हमें प्राप्त हो. (५) हिरण्यवर्णे सुभगे सूर्यवर्णे वपुष्टमे. रुतं गच्छासि निष्कृते निष्कृतिर्नाम वा असि.. (६) हे स्वर्ण के समान वर्ण वाली सुभगा एवं सूर्य के समान चमक वाली ओषधि लाख! तू शरीर को स्वस्थ बनाती है. तू घाव को ठीक करती है, इसलिए तेरा नाम निष्कृति है. (६) हिरण्यवर्णे सुभगे शुष्मे लोमशवक्षणे. अपामसि स्वसा लाक्षे वातो हात्मा बभूव ते.. (७) हे सोने के समान वर्ण वाली, सुभगा, सूर्य के समान वर्ण वाली एवं लोगों का विनाश करने वाली लाख! तू जलों की बहन है और वायु तेरी आत्मा है. (७) सिलाची नाम कानीनो ऽ जबभ्रु पिता तव. अश्वो यमस्य यः श्यावस्तस्य हास्नास्युक्षिता.. (८) हे लाख! तेरे नाम सिलाची और कानीन हैं. बकरियों का पालक तेरा पिता है. यमराज का जो पीले रंग का घोड़ा है, उस के रक्त से तुझे सींचा गया है. (८) अश्वस्यास्नः सम्पतिता सा वृक्षां अभि सिष्यदे. सरा पतत्रिणी भूत्वा सा न एह्यरुन्धति.. (९) ebook converter DEMO Watermarks*