भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 229, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 229

ऋच्छात्.. (३) हे पत्थर के बने हुए घर! तू मेरा है. जो हत्या करने का इच्छुक पापी मुझे पश्चिम दिशा से नष्ट करना चाहता है, वह मेरे समीप आने से पहले ही नष्ट हो जाए. (३) अश्मवर्म मे ऽ सि यो मोदीच्या दिशो ऽ घायुरभिदासात्. एतत् स ऋच्छात्.. (४) हे पत्थर के बने घर! तू मेरा है. जो पापी मेरी हत्या करने की इच्छा से उत्तर दिशा से आता है, वह मेरे समीप आ कर नष्ट हो जाए. (४) अश्मवर्म मे ऽ सि यो मा ध्रुवाया दिशो ऽ घायुरभिदासात्. एतत् स ऋच्छात्.. (५) हे पत्थर के बने हुए घर! तू मेरा है. जो पापी ध्रुव दिशा अर्थात् नीचे की ओर से मुझे नष्ट करने की इच्छा करता है, उस का नाश हो. (५) अश्मवर्म मे ऽ सि यो मा मोर्ध्वाया दिशो ऽ घायुरभिदासात्. एतत् स ऋच्छात्.. (६) हे पत्थर के घर! तू मेरा है. जो पापी मुझे ऊपर की दिशा से समाप्त करना चाहता है, उस का नाश हो. (६) अश्मवर्म मे ऽ सि यो मा दिशामन्तर्देशेभ्यो ऽ घायुरभिदासात्. एतत् स ऋच्छात्.. (७) हे पत्थर के बने हुए घर! तू मेरा है जो पापी दिशाओं के कोनों से मेरा नाश करना चाहता है, उस का नाश हो. (७) बृहता मन उप ह्वये मातरिश्वना प्राणापानौ. सूर्याच्चक्षुरन्तरिक्षाच्छोत्रं पृथिव्याः शरीरम्. सरस्वत्या वाचमुप ह्वयामहे मनोयुजा.. (८) मैं चंद्रमा के मन का आह्वान करता हूं. मैं वायु से प्राण अपान की, सूर्य से नेत्र की, अंतरिक्ष से क्षेत्र की, पृथ्वी से शरीर की और सरस्वती से मन युक्त वाणी की प्रार्थना करता हूं. (८) सूक्त-११ देवता—वरुण कथं महे असुरायाब्रवीरिह कथं पित्रे हरये त्वेषनृम्णः. पृश्निं वरुण दक्षिणां ददावान् पुनर्मघ त्वं मनसाचिकिल्सीः.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*