भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 258, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 258

चित्त्यामस्यामाकूत्यामस्यामाशिष्यस्यां देवहूत्यां स्वाहा.. (९) सूर्य देव अंतरिक्ष के अधिपति अर्थात् हमारे स्वामी हैं. वह हमारी रक्षा करें. वह इस वेदोक्त सहित कर्म में, प्रतिष्ठा में, संकल्प में, वेदों के आह्वान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप में हमारी रक्षा करें. (९) चन्द्रमा नक्षत्राणामधिपतिः स मावतु. अस्मिन् ब्रह्मण्यस्मिन् कर्मण्यस्यां पुरोधायामस्यां प्रतिष्ठायामस्यां चित्त्यामस्यामाकूत्यामस्यामाशिष्यस्यां देवहूत्यां स्वाहा.. (१०) चंद्रमा नक्षत्रों के अधिपति हैं. वह इस वेदोक्त पौरोहित्य कर्म में, प्रतिष्ठा में, संकल्प में, देवाह्वान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी रक्षा करें. (१०) इन्द्रो दिवो ऽ धिपतिः स मावतु. अस्मिन् ब्रह्मण्यस्मिन् कर्मण्यस्यां पुरोधायामस्यां प्रतिष्ठायामस्यां चित्त्यामस्यामाकूत्यामस्यामाशिष्यस्यां देवहूत्यां स्वाहा.. (११) इंद्र स्वर्ग के राजा हैं. वह इस वेदोक्त पौरोहित्य कर्म में, प्रतिष्ठा में, संकल्प में, देवाह्वान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी रक्षा करें. (११) मरुतां पिता पशूनामधिपतिः स मावतु. अस्मिन् ब्रह्मण्यस्मिन् कर्मण्यस्यां पुरोधायामस्यां प्रतिष्ठायामस्यां चित्त्यामस्यामाकूत्यामस्यामाशिष्यस्यां देवहूत्यां स्वाहा.. (१२) मरुतों के पिता पशुओं के अधिपति हैं. वह इस वेदोक्त पौरोहित्य कर्म में, प्रतिष्ठा में, संकल्प में, देवाह्वान कर्म में तथा आशीर्वाद कर्म में मेरी रक्षा करें. (१२) मृत्युः पितॄणामधिपतिः स मावतु. अस्मिन् ब्रह्मण्यस्मिन् कर्मण्यस्यां पुरोधायामस्यां प्रतिष्ठायामस्यां चित्त्यामस्यामाकूत्यामस्यामाशिष्यस्यां देवहूत्यां स्वाहा.. (१३) मृत्यु प्रजाओं के स्वामी है. वह इस वेदोक्त पौरोहित्य कर्म में, प्रतिष्ठा में, संकल्प में, देवाह्वान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी रक्षा करें. (१३) यमः प्रजानामधिपतिः स मावतु. अस्मिन् ब्रह्मण्यस्मिन् कर्मण्यस्यां पुरोधायामस्यां प्रतिष्ठायामस्यां चित्त्यामस्यामाकूत्यामस्यामाशिष्यस्यां देवहूत्यां स्वाहा.. (१४) यम पितरों के अधिपति हैं. वह मेरे इस वेदोक्त पौरोहित्य कर्म में, प्रतिष्ठा में, संकल्प में, देवाह्वान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी सहायता करें. (१४) ebook converter DEMO Watermarks*