भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 278, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 278

सूक्त-६ देवता—ब्रह्मणस्पति यो ३ स्मान् ब्रह्मणस्पते ऽ देवो अभिमन्यते. सर्वं तं रन्धयासि मे यजमानाय सुन्वते.. (१) हे ब्रह्मणस्पति देव! जो देव विरोधी शत्रु हमें वध करने योग्य मानता है, उस को सोम रस निचोड़ने वाले मुझ यजमान के वश में करो. (१) यो नः सोम सुशंसिनो दुःशंस आदिदेशति. वज्रेणास्य मुखे जहि स संपिष्टो अपायति.. (२) हे सोम! दुर्वचन बोलने वाला जो शत्रु हमें बाधा पहुंचाता है और अपने कठोर वचनों से हमारा पराभव करता है, उस के मुख पर वज्र का प्रहार करो. वह शत्रु वज्र के आघात से छिन्नभिन्न हो कर भाग जाए. (२) यो नः सोमाभिदासति सनाभिर्यश्च निष्ट्यः. अप तस्य बलं तिर महीव द्यौर्वधत्मना.. (३) हे सोम! हमारा जो संबंधी हमारा अभिभव करना चाहता है तथा जो निकृष्ट शत्रु हमें बाधा पहुंचाता है, तुम उस को उसी प्रकार नष्ट कर दो, जिस प्रकार द्युलोक वज्र के द्वारा विनाश करता है. (३) सूक्त-७ देवता—सोम येन सोमादितिः पथा मित्रा वा यन्त्यद्रुहः. तेना नो ऽ वसा गहि.. (१) हे सोम! जिस मार्ग से, अदिति मित्र एवं उस के बारह पुत्र अनुग्रह करते हुए सरंचना करते हैं, उसी मार्ग से हमारा कल्याण करते हुए आओ. (१) येन सोम साहन्त्यासुरान् रन्धयासि नः. तेना नो अधि वोचत.. (२) हे सोम! जिस बल के द्वारा तुम हमारे शक्तिशाली शत्रुओं का विनाश करते हो, उसी शक्ति के द्वारा हमें आशीर्वाद वचन सुनाओ. (२) येन देवा असुराणामोजांस्यवृणीध्वम्. तेना नः शर्म यच्छत.. (३) हे देवो! तुम अपने जिस बल से शत्रुओं की शक्ति अपने में मिला लेते हो, उसी बल के द्वारा हमारे लिए सुख प्रदान करो. (३) सूक्त-८ देवता—कामात्मा ebook converter DEMO Watermarks*

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