अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंततस्त ईर्ष्यां मुञ्चामि निरूष्माणं दृतेरिव.. (३) हे ईर्ष्याग्रस्त पुरुष! लोहार जिस प्रकार भस्त्रा अर्थात् धौंकनी से सांस बाहर निकालता है, वैसे ही मैं तेरे हृदय से ईर्ष्या दूर करता हूं. (३) सूक्त-१९ देवता—मंत्र में उक्त पुनन्तु मा देवजनाः पुनन्तु मनवो धिया. पुनन्तु विश्वा भूतानि पवमानः पुनातु मा.. (१) देवगण मुझे पवित्र करें. मनुष्य मुझे बुद्धि अथवा कर्म के द्वारा पवित्र करें. सभी प्राणी मुझे पवित्र करें और अंतरिक्ष में विचरण करने वाली वायु मुझे पवित्र करे. (१) पवमानः पुनातु मा क्रत्वे दक्षाय जीवसे. अथो अरिष्टतातये.. (२) निचोड़ा जाता हुआ सोम मुझे यज्ञ कर्म के लिए, बल प्राप्ति के लिए, जीवन के लिए तथा अहिंसा करने के लिए पवित्र करे. (२) उभाभ्यां देव सवितः पवित्रेण सवेन च. अस्मान् पुनीहि चक्षसे.. (३) हे सब के प्रेरक सविता देव! तुम्हारा तेज पवित्र करने का साधन है. अपने तेज और प्रेरणा से हमें इहलोक और परलोक के सुख के साधन यज्ञ के लिए शुद्ध करो. (३) सूक्त-२० देवता—यक्ष्मा नाशक अग्नेरिवास्य दहत एति शुष्मिण उतेव मत्तो विलपन्नपायति. अन्यमस्मदिच्छतु कं चिद्व्रतस्तपुर्वधाय नमो अस्तु तक्मने.. (१) गीले और सूखे सब को जलाने वाली दावाग्नि के समान अंगों को जलाने वाले इस ज्वर का दाह सारे शरीर में व्याप्त है. उस समय व्यक्ति उन्मत्त के समान विलाप करता हुआ इस लोक से चला जाता है. इस प्रकार का प्रबल पित्त ज्वर हमें त्याग कर किसी चरित्रहीन पुरुष के पास चला जाए. (१) नमो रुद्राय नमो अस्तु तक्मने नमो राज्ञे वरुणाय त्विषीमते. नमो दिवे नमः पृथिव्यै नम ओषधीभ्यः.. (२) ज्वर के अभिमानी देव रुद्र के लिए नमस्कार है. ज्वर के लिए नमस्कार है. दीप्तिशाली एवं स्वामी वरुण के लिए नमस्कार है. द्युलोक तथा पृथ्वी के लिए नमस्कार है. पृथ्वी पर उत्पन्न ओषधियों को नमस्कार है. (२) ebook converter DEMO Watermarks*