भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 332, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 332

यो अद्य सेन्यो वधो जिघांसन् न उदीरते. इन्द्रस्य तत्र बाहू समन्तं परि दद्म:... (२) इस समय शत्रुओं की सेनाओं के आयुध हमें मारने के लिए उठ रहे हैं. इस वध से हमारी रक्षा के लिए इंद्र की भुजाएं सर्वत्र सहायता करें. हे राजन्! हे सविता! हे सोम! विनाश से बचने के लिए मुझे संग्राम में उत्तम विजय प्रदान करो. (२) परि दद्म इन्द्रस्य बाहू समन्तं त्रातुस्त्रायतां नः. देव सवितः सोम राजन्सुमनसं मा कृणु स्वस्तये.. (३) पालनकर्ता इंद्र की भुजाएं हम अपने चारों ओर धारण करते हैं, वे सब ओर से हमारी रक्षा करें. हे सबके प्रेरक और राजा सोम देव! मुझे संग्राम ने नष्ट न होने वाला और शोभन विजय वाला बनाओ. (३) सूक्त-१०० देवता—वनस्पति देवा अदुः सूर्यो अदाद् द्यौरदात् पृथिव्यदात्. तिस्रः सरस्वतीरदुः सचित्ता विषदूषणम्.. (१) इंद्र आदि सभी देवों ने एकमत हो कर मुझे स्थावर और जंगम विष को दूर करने वाली ओषधि प्रदान की है. सूर्य, आकाश एवं पृथ्वी ने मुझे विष नाशक ओषधि दी है. इड़ा, सरस्वती और भारती—इन तीन देवियों ने एकमत हो कर मुझे विष नाशक ओषधि प्रदान की है. (१) यद् वो देवा उपजीका आसिञ्चन् धन्वन्युदकम्. तेन देवप्रसूतेनेदं दूषयता विषम्.. (२) हे देवो! तुम से संबंधित और वल्मीक का निर्माण करने वाले उपजीक नामक प्राणियों ने जलहीन स्थान में तुम्हारा वरदान पा कर जो जल बरसाया, देवों द्वारा दिए हुए उस जल से, इस विष का प्रभाव नष्ट करो. (२) असुराणां दुहितासि सा देवानामासि स्वसा. दिवस्पृथिव्याः संभूता सा चकर्थारसं विषम्.. (३) हे वल्मीक की मिट्टी! तुम देव विरोधी असुरों की पुत्री और देवों की बहन हो. आकाश और धरती से उत्पन्न वल्मीक की यह मिट्टी स्थावर और जंगम प्राणियों से उत्पन्न विष को प्रभावहीन करे. (३) सूक्त-१०१ देवता—बृहस्पति ebook converter DEMO Watermarks*

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित) · पृष्ठ 332, कुल 1063 में से · BharatKosha