भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 334, कुल 1063 में से

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उत्पन्न नीलांजन, मधूक वृक्ष की लकड़ी, कूठ नामक वनस्पति और खस को पीस कर बनाए गए उबटन से तेरे शरीर पर लेप करता हूं. (३) सूक्त-१०३ देवता—बृह्मणस्पति संदानं वो बृहस्पतिः संदानं सविता करत्. संदानं मित्रो अर्यमा संदानं भगो अश्विना.. (१) हे शत्रु सेनाओ! बृहस्पति देव इन फेंके हुए पाशों के द्वारा तुम्हारा बंधन करें. सब के प्रेरक सविता देव तुम्हारा बंधन करें. मित्र तथा अर्यमा देव तुम्हारा बंधन करें. भग और अश्विनीकुमार तुम्हारा बंधन करें. (१) सं परमान्त्समवमानथो सं द्यामि मध्यमान्. इन्द्रस्तान् पर्यहार्दाम्ना तानग्ने सं द्या त्वम्.. (२) मैं शत्रु की दूर देश वर्तिनी तथा समीप वर्तिनी सेनाओं को पाशों के द्वारा बांधता हूं. मैं समीप और दूर के मध्य स्थान में वर्तमान सेनाओं को भी पाशों से बांधता हूं. इस प्रकार की सेनाओं एवं सेनापतियों को संग्राम के स्वामी इंद्र त्याग दें. हे अग्नि! इंद्र द्वारा त्यागे हुए इन क्षत्रियों को तुम पाशों से बांधो. (२) अमी ये युधमायन्ति केतून् कृत्वानीकशः. इन्द्रस्तान् पर्यहार्दाम्ना तानग्ने सं द्या त्वम्.. (३) हमारे प्रति प्रसन्न बने हुए इंद्र देव और अग्नि देव हमारे उन शत्रुओं को बंधन में बांधें. (३) सूक्त-१०४ देवता—इंद्र आदानेन संदानेनामित्रान्ा द्यामसि. अपाना ये चैषां प्राणा असुनासून्त्समच्छिदन्.. (१) आदान नाम के पाश यंत्र विशेष के द्वारा तथा संधान नाम के पाश यंत्र के द्वारा हम शत्रुओं को बांधते हैं. इन शत्रुओं की प्राण एवं अपान वायु को मैं अपने प्राण के द्वारा भलीभांति छिन्न करता हूं. (१) इदमादानमकरं तपसेन्द्रेण संशितम्. अमित्रा ये ऽ त्र नः सन्ति तानग्न आ द्या त्वम्.. (२) मैं ने तप के द्वारा बांधने का साधन यह पाश यंत्र निर्मित किया है. इसे इंद्र ने पहले ही तेज कर दिया है. इस संग्राम में हमारे जो शत्रु हैं, हे अग्नि! उन सब को पाश बंधन से बांधो. ebook converter DEMO Watermarks*