भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 341, कुल 1063 में से

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गया है. इस कारण यदि ग्रहणशील पाप देवता ग्राही ने तुम्हें प्राप्त किया है तो उसे देवगण मंत्र के द्वारा नष्ट कर दें. (३) सूक्त-११४ देवता—विश्वे देव यद् देवा देवहेडनं देवासश्चकृमा वयम्. आदित्यास्तस्मान्नो यूयमृतस्यर्तेन मुञ्चत.. (१) हे अग्नि आदि देवो! इंद्रियों के वशीभूत हो कर हम ने जो पाप किया है, हे अदिति पुत्र देवो! तुम यज्ञ संबंधी सत्य के द्वारा उस पाप से हमें बचाओ. (१) ऋतस्यर्तेनादित्या यजत्रा मुञ्चतेह न:. यज्ञं यद् यज्ञवाहस: शिक्षन्तो नोपशेकिम.. (२) हे अदिति पुत्र देवो! तुम यज्ञ के द्वारा प्रसन्न करने योग्य हो. तुम यज्ञ संबंधी सत्य के द्वारा इस यज्ञ कार्य द्वारा हमें सभी पापों से मुक्त करो. (२) मेदस्वता यजमाना: सुचाज्यानि जुह्वत:. अकामा विश्वे वो देवा: शिक्षन्तो नोप शेकिम.. (३) चरबी वाले पशु से यज्ञ पूर्ण करते हुए यजमान सुच (चमस) के द्वारा यज्ञ में आज्य डालते हैं. हे विश्वे देव! हम कामना रहित हो कर और पाप से डरते हुए पाप के वश में न हों. (३) सूक्त-११५ देवता—विश्वे देव यद् विद्वांसो यदविद्वांस एनांसि चकृमा वयम्. यूयं नस्तस्मान्मुञ्चत विश्वे देवा: सजोषस:.. (१) हे विश्वे देवो! पाप का निमित्त जानते हुए अथवा न जानते हुए हम ने जो पाप किया, हमारे साथ प्रसन्न होते हुए तुम हमें उस पाप से छुड़ाओ. (१) यदि जाग्रद् यदि स्वप्नेन एनस्यो ऽ करम्. भूतं मा तस्माद् भव्यं च द्रुपदादिव मुञ्चताम्.. (२) पाप को प्रेम करने वाले हम ने जाग्रत अवस्था में अथवा सोते हुए जो पाप किए, उन से विश्वे देव हमें भूतकाल और भविष्यकाल में काठ के चरण बंधन के समान छुड़ाएं. (२) द्रुपदादिव मुमुचान: स्विन्न: स्नात्वा मलादिव. पूतं पवित्रेणेवाज्यं विश्वे शुम्भन्तु मैनस:.. (३) ebook converter DEMO Watermarks*