भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 352, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 352

हे मरुद्गण! इस स्त्री को मतवाली बनाओ. हे आकाश! तुम भी इसे मतवाली बना कर मेरे वश में करो. हे अग्नि देव! तुम इसे मतवाली बनाओ, जिस से यह अपनेआप को भूल कर मेरा चिंतन करे. (४) सूक्त-१३१ देवता—स्मर नि शीर्षतो नि पत्तत आध्यो ३ नि तिरामि ते. देवाः प्र हिणुत स्मरमसो मामनु शोचतु.. (१) हे पत्नी! मैं तेरे सिर से ले कर सारे शरीर में चिंताओं का प्रवेश कराता हूं! देवगण तेरे प्रति कामदेव को भेजें, जिस से दुःखी हो कर तू मेरा चिंतन करे. (१) अनुमते ऽ न्विदं मन्यस्वाकूते समिदं नमः. देवाः प्र हिणुत स्मरमसौ मामनु शोचतु.. (२) हे सब कर्मों की अनुमति देने वाली देव पत्नी! मुझ पर कृपा करो. हे संकल्प की देवी आकूति! तुम मेरे इस नमस्कार को स्वीकार करो. हे देवो! इस के प्रति कामदेव को भेजो, जिस से दुःखी हो कर यह मेरा स्मरण करे. (२) यद् धावसि त्रियोजनं पञ्चयोजनमाश्विनम्. ततस्त्वं पुनरायसि पुत्राणां नो असः पिता.. (३) हे पुरुष! यदि तू यहां से भाग कर तीन योजन दूर चला जाता है, पांच योजन दूर चला जाता है अथवा उतनी दूर चला जाता है, जितनी दूर घोड़ा दिनभर में पहुंच सकता है, तू वहां से भी मेरे पास आ जा और मेरे पुत्रों का पिता बन. (३) सूक्त-१३२ देवता—स्मर यं देवाः स्मरमसिञ्चन्नप्स्व १ न्तः शोशुचानं सहाध्या. तं ते तपामि वरुणस्य धर्मणा.. (१) सभी देवों ने कामदेव को उस की पत्नी, आधि अर्थात् चिंता के साथ जल में डुबो दिया, क्योंकि वह उस के वियोग में संतप्त था. हे नारी! मैं तेरे लिए उस कामदेव को जल के स्वामी वरुण की धारण शक्ति से संतप्त करता हूं. (१) यं विश्वे देवाः स्मरमसिञ्चन्नप्स्व १ न्तः शोशुचानं सहाध्या. तं ते तपामि वरुणस्य धर्मणा.. (२) विश्वे देव नामक देवों ने कामदेव को उस की पत्नी आधि अर्थात् चिंता के साथ जल में डुबो दिया, क्योंकि वह उस के वियोग में संतप्त था. हे नारी! मैं तेरे लिए उस कामदेव को ebook converter DEMO Watermarks*