भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 354, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 354

मृत्योरहं ब्रह्मचारी यदस्मि निर्वाचन् भूतात् पुरुषं यमाय. तमहं ब्रह्मणा तपसा श्रमेणानयैनं मेखलया सिनामि.. (३) मैं ब्रह्मचारी होने के कारण सूर्य के पुत्र यमराज का सेवक हूं. इसी कारण मैं प्राणियों में से अपने शत्रु के विनाश हेतु यमराज से प्रार्थना करता हूं. मारने योग्य उस शत्रु को मैं मंत्र, तप, शारीरिक दंड एवं मेखला के द्वारा बांधता हूं. (३) श्रद्धाया दुहिता तपसो ऽ धि जाता स्वस ऋषीणां भूतकृतां बभूव. सा नो मेखले मतिमा धेहि मेधामथो नो धेहि तप इन्द्रियं च.. (४) श्रद्धा की पुत्री सृष्टि के आदि में ब्रह्म के तप से उत्पन्न हुई. प्राणियों को जन्म देने वाले मरीचि आदि ऋषियों की जो यह मेखला है, वह इसी प्रकार उत्पन्न हुई है. हे मेखला! तू हमें क्रांतदर्शिनी बुद्धि प्रदान कर तथा हमें मेधा दे. इस के अतिरिक्त तू मुझे ताप तथा वीर्य प्रदान कर. (४) यां त्वा पूर्वे भूतकृत ऋषयः परिबेधिरे. सा त्वं परि ष्वजस्व मां दीर्घायुत्वाय मेखले.. (५) हे मेखला! पृथ्वी आदि तत्त्वों की रचना करने वाले प्राचीन ऋषियों ने तुझे बांधा था. दीर्घ आयु प्रदान करने के लिए तू मेरा भी आलिंगन कर. (५) सूक्त-१३४ देवता—वज्र अयं वज्रस्तर्पयतामृतस्यावास्य राष्ट्रमप हन्तु जीवितम्. शृणातु ग्रीवाः प्र शृणातूष्णिहा वृत्रस्येव शचीपतिः.. (१) मेरे द्वारा धारण किया गया, यह दंड इंद्र के वज्र के समान सत्य और यज्ञ के सामर्थ्य से तृप्त हो. यह वज्र हमारे द्वेषी राजा के राष्ट्र का विनाश करे तथा उस की गले की हड्डियां काट दे. यह गले की धमनियों को भी उसी प्रकार काट दे, जिस प्रकार शचीपति इंद्र ने वृत्र के गले की धमनियां काटी थी. (१) अधरो ऽ धर उत्तरेभ्यो गूढः पृथिव्या मोत्सृपत्. वज्रेणावहतः शयाम्.. (२) अधिक ऊंचों की अपेक्षा, अतिशय अधोगति वाला एवं धरती में छिपा हुआ धरती से बाहर न निकले, वह इस वज्र के द्वारा घायल हो कर सोता रहे. (२) यो जिनाति तमन्विच्छ यो जिनाति तमिज्जहि. जिनतो वज्र त्वं सीमन्तमन्वञ्चमनु पातय.. (३)